पानीपत। गुरुद्वारा भाई लालो जी सिंह सभा पटेल नगर तहसील कैंप पानीपत की ओर से श्री गुरुनानक देव जी का 552वां प्रकाश उत्सव के उपलक्ष्य में नगर कीर्तन निकाला गया। इसमें कई धार्मिक एक सामाजिक संस्थाओं ने भाग लिया। प्रभात फेरी के रूप में निकाले गए इस नगर कीर्तन में क्षेत्र के प्रमुख गुरुद्वारों और मंदिरों की प्रभात फेरियां शामिल हुईं।
इनमें गुरुद्वारा श्री गुरुनानक द्वारा, श्री राम मंदिर, श्री हनुमान मंदिर फतेहपुरी चौक, गुरुद्वारा माया देवी जी, गुरुद्वारा फतेहपुरी, गुरुद्वारा बंदा सिंह बहादुर, गुरुद्वारा कलगीधर सिंह सभा, श्री हनुमान मंदिर पटेल नगर की प्रभातफेरी शामिल रही। इसके अलावा प्रेम मंदिर पटेल नगर, प्राचीन शिव मंदिर राम नगर, प्रेम मंदिर पटेल नगर, गुरुद्वारा भाई केसर सिंह, गुरुद्वारा भाई लालो जी, गुरुद्वारा राम गड़िया सिंह सभा, स्त्री सत्संग सभा, गुरुद्वारा गुरू अर्जुन देव जी आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे।
पंज प्यारों ने की नगर कीर्तन की अगुवाई
श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी की छत्रछाया में निकाले गए नगर कीर्तन की अगुवाई पंच प्यारों ने की। नगर कीर्तन भाई लालो जी चौक पटेल नगर से सुबह 8 बजे शुरू होकर तहसील टाऊन के मुख्य मार्गों फतेहपुरी चौक, जट्टू चौक, भूल भुलैया चौंक, भावना चौक, दुष्यंत नगर, अशोक नगर, न्यू रमेश नगर, जवाहर नगर, भगत नगर और ग्रीन पार्क से होते हुए 2 बजे गुरुद्वारा भाई लालो जी में संपन्न हुआ। नगर कीर्तन के रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने लंगर के स्टाल लगाए हुए थे। नगर कीर्तन की समाप्ति पर गुरुद्वारा भाई लालो जी में लंगर लगाया गया।
नगर कीर्तन ने दिलाई गुरुनानक देव जी के उपदेशों की याद
कौमी एकता के प्रतीक इस नगर कीर्तन का उद्देश्य श्री गुरुनानक देव जी के उन उपदेशों को याद दिलाना था, जिसमें उन्होंने समस्त मानव जाति को एक ईश्वर की संतान बताते हुए सच की कमाई करने पर बल दिया था। वे एक निर्भीक एवं क्रांतिकारी संत थे जिन्होंने बेईमानी, घूसखोरी, पाखंड तथा शोषण के खिलाफ आवाज उठाई थी। गुरु जी के उपदेश विश्व शांति और सांप्रदायिक सद्भावना के लिए हमेशा सार्थक रहेंगे। इस नगर कीर्तन में सभी धार्मिक संस्थाओं के सदस्य तथा प्रधान मौजूद थे। इनमें सुखविंद्र सिंह, बलविंद्र सिंह, अवतार सिंह, रविंद्र सिंह, सुरेश मदान, परविंद्र सिंह, सचियार सिंह, सुखवंत सिंह, उत्तम सिंह शामिल रहे।
19 नवंबर को मनाई जाएगी गुरुनानक जयंती
हिंदू धर्म में जिस तरह कार्तिक मास में आने वाली दिवाली सबसे बड़ा त्योहार हैं, वैसे ही सिख धर्म के लिए कार्तिक मास की पूर्णिमा को मनाई जाने वाली गुरु नानक जयंती सबसे बड़ा पर्व है। इसे प्रकाश पर्व या फिर गुरु पर्व भी कहते हैं। इसी दिन सिख धर्म के सबसे प्रथम गुरु, गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। इस दिन सिख धर्म को मानने वाले भजन कीर्तन करते हैं और वाहेगुरु का जाप करते हैं। इस साल 19 नवंबर को गुरु नानक जयंती है।