कोयले के बाद अब एलपीजी के रेट बढ़ने से उद्यमियों के लिए व्यापार करना मुश्किल हो गया है। पिछले एक माह में एलपीजी के दाम 23 रुपये बढ़ चुके हैं। उद्यमियों को अब 51 की बजाय 74 रुपये किलोग्राम के हिसाब से एलपीजी मिल रही है। ऐसे में हर उद्यमी को एक दिन में 50 हजार रुपये तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। एलपीजी महंगी होने से डाइंग, प्रिटिंग, कंबल और बेडशीट का उत्पादन भी 20 प्रतिशत तक महंगा हो चुका है। उद्यमियों ने जो ऑर्डर लिए हैं, उन्हें पुराने रेट में पूरा करना पड़ रहा है, ऐसे में उद्यमियों को करोड़ों रुपये का घाटा हो रहा है। उद्यमियों की सरकार से मांग है कि एलपीजी के रेट कम किए जाए।
अनिल कुमार, संजीव अरोड़ा, भीम राणा ने बताया कि एलपीजी के रेट बढ़ने से उन्हें कोयले का प्रयोग करना पड़ेगा, इससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा। पानीपत के 70 बड़े उद्योगों में एलपीजी का प्रयोग होता है, जोकि लगातार बढ़ रहे एलपीजी के दामों से बंद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। अब उद्यमी एनसीआर से पलायन करने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि एक उद्योग में औसतन हर रोज 5 टन एलपीजी की लागत है। एक दिन में पानीपत के उद्योगों में 350 टन एलपीजी की लागत हो रही है। उद्यमी प्रयोग के लिए 19, 23 व 50 किलोग्राम के सिलिंडर इस्तेमाल कर रहे हैं। उद्यमी एक दिन में 2 करोड़ 59 लाख रुपये की एलपीजी खरीद रहे हैं। हर उद्यमी को बढ़े दामों के कारण 50 हजार रुपये का प्रतिदिन नुकसान हो रहा है।
एनजीटी के निर्देशों पर कोयले को छोड़ एलपीजी प्रयोग कर रहे थे उद्यमी
एनजीटी ने 2018 में एनसीआर में उद्यमियों को निर्देश दिए थे कि वो उद्योगों में पीएनजी की सप्लाई लें, ताकि पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। 2019 में अक्तूबर में एनजीटी ने पीएनजी की सप्लाई नहीं लेने वाले उद्योगों पर ताला लगाने के निर्देश दे दिए थे। सरकार के हस्तक्षेप के बाद एनजीटी ने राहत देते हुए एलपीजी का भी विकल्प चुनने की छूट दे दी थी। इसके बाद पानीपत के 70 उद्यमियों ने अपने उद्योगों में सेटअप बदलकर एलपीजी का करा लिया था। अब एलपीजी के रेट बढ़ने से परेशान उद्यमी दोबारा कोयले के प्रयोग की ओर जा रहे हैं।
एनजीटी ने इंडिया के कोयले पर लगाया है प्रतिबंध
एनजीटी ने प्रदूषण की समस्या को देखते हुए बॉयलर में इंडिया के कोयले पर प्रतिबंध लगाया था। उद्यमियों ने इंडोनेशिया के कोयले का इस्तेमाल शुरू कर दिया था। एक माह में कोयले का रेट 7 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 15 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया। इसलिए कपड़े का उत्पादन बहुत महंगा हो गया।
उद्यमी पलायन को मजबूर हैं- भीम
गैस के रेट एक माह में 23 रुपये बढ़ गए हैं। एनजीटी के निर्देश पर उद्यमियों ने एलपीजी की सप्लाई ले ली थी। अब उद्यमी एनसीआर से पलायन करने को मजबूर हैं। कई बड़े प्रोजेक्ट पानीपत से पंजाब जा चुके हैं। कोयले के रेट में बढ़ोत्तरी होने से अब कंबल , बेडशीट, डाइंग व प्रिटिंग के रेट 20 प्रतिशत बढ़ गए हैं। हमें पुराने रेट पर उत्पादन करना पड़ रहा है। इससे हर रोज 50 हजार का नुकसान हो रहा है।
भीम राणा, अध्यक्ष डायर्स एसोसिएशन
उद्यमियों को प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग नहीं करने देंगे। अगर कोई उद्यमी प्रतिबंधित फ्यूल का प्रयोग करते मिला तो कार्रवाई निश्चित है। एनजीटी के निर्देशों पर ही काम किया जाएगा। पर्यावरण को स्वच्छ रखना हम सबका फर्ज है।
कमलजीत सिंह, रीजनल ऑफिसर , एचएसपीसीबी