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पानीपत में कैंसर का मुख्य कारण बढ़ता प्रदूषण, मुंह के सबसे ज्यादा मरीज

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पानीपत। डॉ अभिनव व डॉ हेमेंद्र। - फोटो : Panipat
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पानीपत। पानीपत में कैंसर का मुख्य कारण बढ़ता प्रदूषण है। आंकड़ों के मुताबिक, सबसे अधिक कैंसर के मरीज मुंह के हैं। इसके बाद महिलाओं में यूट्रस कैंसर और स्तन कैंसर के मामले आते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, लोगों में कैंसर को लेकर जागरूकता की कमी ज्यादातर मामलों में जानलेवा साबित हो रही है, लेकिन समय रहते कैंसर रोगियों की जान बचाई जा सकती है। दूसरी ओर जिले के कैंसर रोगियों को इलाज के लिए पीजीआई और दिल्ली के अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है।
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जिले में आंकड़ों की बात करें तो पिछले पांच वर्ष के दौरान जिले में कैंसर के 610 केस आए हैं। यह स्वास्थ्य विभाग का कहना है हालांकि इसे निजी अस्पताल सही नहीं मानते। उनके अनुसार जिले में कैंसर के पांच हजार से अधिक रोगी हैं। दरअसल, पानीपत में कैंसर की प्रारंभिक जांच की सुविधा तक नहीं है। ऐसे में कैंसर की शंका होने पर मरीजों को रोहतक पीजीआई, चंडीगढ़ पीजीआई या दिल्ली के अस्पतालों की दौड़ लगानी पड़ती है।
चार फरवरी को विश्व कैंसर दिवस है लेकिन टेक्सटाइल सिटी होकर देश-विदेश में ख्याति रखने वाले पानीपत में इसकी जांच का इंतजाम तक नहीं है। जबकि इसकी यहां पर बहुत आवश्यकता है। दरअसल, यहां प्रदूषण अत्यधिक है। निजी अस्पतालों में मात्र एक डॉ. प्रेम अस्पताल ही है, जहां कैंसर का इलाज किया जा रहा है।
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फ्री बस पास नहीं लिया तो कैंसर मरीजों में गिनती नहीं
रोहतक पीजीआई में कैंसर की पुष्टि होने के बाद यदि कोई मरीज सिविल हॉस्पिटल से फ्री बस पास की पर्ची नहीं लेता तो उसकी गिनती पानीपत के कैंसर मरीजों में नहीं की जाती है। ऐसे मरीजों का आंकड़ा रोहतक पीजीआई में ही दर्ज किया जाता है।
वर्ष 2021 में जिले में कैंसर के 139 नए केस मिले हैं। 2020 में कैंसर के 71 नए रोगी आए थे। पानीपत में 2017 से 2019 तक कैंसर के 400 मरीज सामने आए थे। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उद्योग नगरी पानीपत में दूसरे प्रदेशों के लोगों की संख्या अधिक है। इनमें मुंह के कैंसर के मामले सर्वाधिक हैं।
हर माह हो रही कैंसर की 50 सर्जरी
डा. प्रेम कैंसर अस्पताल के निदेशक डॉ. अभिनव ने बताया कि पानीपत में कैंसर बढ़ने का बड़ा कारण बढ़ता प्रदूषण स्तर है। उन्होंने बताया कि उनके यहां अस्पताल में हर माह करीब 50 सर्जरी हो रही है। उन्होंने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कैंसर बड़ी परेशानी बन रही है। उन्होंने बताया कि अब तक वह करीब एक हजार रेडियो थैरेपी कर चुके हैं। उनके पास डॉ. हमेंद्र नागपाल जैसे विशेषज्ञ हैं, जो प्रदेश में एकमात्र एमसीएच कैंसर सर्जन हैं।
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