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अपने पहले ओलंपिक में पहले प्रयास में ही पहले नंबर पर पहुंचे नीरज

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पानीपत। घर पर सुबह 05:30 बजे टीवी पर एक साथ बैठकर नीरज चोपड़ा का मैच देखते परि वार के सदस्य। - फोटो : Panipat
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भाला फेंक एथलीट नीरज चोपड़ा अपने पहले ओलंपिक में पहले ही प्रयास में अपने ग्रुप में टॉप पर रहे। नीरज के प्रदर्शन से उनके गांव खंडारा में खुशी और उत्साह का माहौल है। साथ ही नीरज के ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने की आशा भी बढ़ गई हैं।
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गांव खंडरा निवासी नीरज चोपड़ा ने बुधवार को सुबह 5: 35 बजे शुरू हुए ओलंपिक के मुकाबले में 86.65 मीटर भाला फेंककर एक ओलंपिक मेडल की आस और जगाई। गांव के घर की बैठक में सुबह परिवार के साथ ही गांव के अन्य लोगों ने एक साथ नीरज का मैच देखा। नीरज के चाचा भीम चोपड़ा ने घर के सभी बच्चों को रात में ही बोल दिया था कि कोई भी बच्चा सुबह अभ्यास के लिए नहीं जाएगा। सुबह सभी एक साथ नीरज का मैच देखेंगे। उनके पिता सतीश चोपड़ा, चाचा भीम चोपड़ा व सुरेंद्र चोपड़ा ने कहा कि नीरज ने बेहतरीन प्रदर्शन किया है। 7 अगस्त को फाइनल में भी नीरज का प्रदर्शन बेहतरीन रहेगा। जब भाला 86.65 मीटर दूर गया तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा।
टोक्यो पहुंचने के बाद से परिवार की नीरज से नहीं हो सकी है बात
नीरज के चाचा भीम चोपड़ा ने बताया कि टोक्यो जाने के बाद नीरज से एक बार भी बात नहीं हुई है। आठ दिन पहले नीरज का वीडियो कॉल आया था, उसने घर के सभी सदस्यों से बात की थी। उसके बाद से उसका कोई कॉल नहीं आया है। फाइनल में प्रवेश करने के बाद बुधवार को भी नीरज का कॉल नहीं आया। उनके चाचा ने बताया कि वह कभी दिखावे में ध्यान नहीं देता, बल्कि अपने समय का सदुपयोग करके अभ्यास करता है।
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अफवाहों और नकारात्मक चीजों से दूर रहने के लिए बनाई सोशल मीडिया से दूरी
अफवाहों और नकारात्मक चीजों से दूर रहने के लिए नीरज चोपड़ा लगभग दो साल से सोशल मीडिया से दूर हैं। सोशल मीडिया पर उनकी फोटो भी मैनेजर अपलोड करते हैं। नीरज के चाचा ने बताया कि नीरज हमेशा सकारात्मक रहता है। नीरज चोपड़ा के घर के गेट पर ओलंपिक के पांच रिंग के निशान हैं। साथ ही भारत का झंडा भी लगा है।
विश्व रिकॉर्ड धारक भी नीरज से पीछे
ओलंपिक में नीरज चोपड़ा की टक्कर केवल जोहान्स वेटर से थी, जिनका 97.76 मीटर का वर्ल्ड रिकॉर्ड है, लेकिन नीरज ने अपने मुकाबले में उनको भी पछाड़कर अपने ग्रुप में पहला स्थान प्राप्त किया।
जर्मनी में की ट्रेनिंग
शिवाजी स्टेडियम में पहली बार भाला फेंकने से सफर शुरू करने वाले नीरज चोपड़ा ने पानीपत के बाद यमुनानगर, फिर पटियाला और ओलंपिक के लिए जर्मनी में ट्रेनिंग ली थी।
सेना में भर्ती होने के बाद फिर से जगी थी अंतरराष्ट्रीय खेल की उम्मीद
भारतीय सेना में भर्ती होने के बाद नीरज में फिर से अंतरराष्ट्रीय खेल और ओलंपिक खेलने की उम्मीद जगी थी। वर्ष 2016 में नीरज ने भारतीय सेना ज्वाइन की थी। इससे पहले नीरज के पास तैयारी के लिए पूरे उपकरण नहीं होते थे, लेकिन भारतीय सेना में सूबेदार होने के बाद उनकी तैयारी और भी अच्छी हो गई। 2016 में ही वर्ल्ड यू-2020 में उन्होंने पहला अंतरराष्ट्रीय गोल्ड मेडल जीता था।
कोहनी में चोट ने दिया था झटका
दायीं कोहनी की चोट से उबरने के बाद नीरज ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। चोट की वजह से नीरज कई महीने खेल से दूर रहे, लेकिन चोट से उबरने के बाद दमदार वापसी की। साउथ अफ्रीका में आयोजित एथलेटिक्स सेंट्रल नार्थ ईस्ट मीट में 87.86 मीटर भाला फेंक कर टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया। इससे पहले कोहनी में चोट की वजह से छह महीने अभ्यास नहीं हो सका था। कोहनी की सर्जरी कराने के बाद नीरअज ने डॉ. क्लाउस से ट्रेनिंग लेने का विकल्प चुना था।
टोक्यो ओलंपिक के फाइनल में बना सकते हैं नया रिकॉर्ड
एशियन गेम्स में 88.06 का नेशनल रिकॉर्ड बनाने वाले नीरज चोपड़ा ने अपना रिकॉर्ड तोड़कर 5 मार्च को ग्रैंड प्रिक्स चैंपियनशिप में नया 88.07 का नया कीर्तिमान स्थापित किया था। उनके कोच डॉ. क्लाउस और पूर्व कोच हॉन को भी उम्मीद है कि वह टोक्यो ओलंपिक में गोल्ड मेडल लाने के साथ ही रिकार्ड भी बनाएंगे।

पानीपत। पानीपत जिले के मतलौडा ब्लॉक के खंड़रा गांव में स्थित नीरज चोपड़ा के घर के बाहर गेट पर बना ?- फोटो : Panipat

पानीपत। नीरज चोपड़ा के दादा धर्म सिंह को मिठाई खिलाकर बधाई देते हुए ग्रामीण व साथ में मौजूद अन्य ?- फोटो : Panipat

पानीपत। नीरज चोपड़ा फाइनल मैच में पहुंचने की खुशी में दादा धर्म सिंह व चाचा भीम चोपड़ा विक्ट्री च- फोटो : Panipat

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