पानीपत। कोरोना की तीसरी लहर रफ्तार पकड़ रही है। ऐसे में सरकार ने शाम छह बजे के बाद पाबंदियां लागू की हैं। इन हालातों में श्रमिकों को लॉकडाउन का भय सताने लगा है। कई श्रमिकों ने भय से पलायन शुरू कर दिया है। उद्यमियों के अनुसार, करीब 10 प्रतिशत श्रमिक पलायन कर चुके हैं। ऐसे में उद्यमियों ने मांग की है कि सरकार उद्योगों को पूरे सप्ताह चलने की अनुमति दे, ताकि श्रमिकों के पलायन को रोका जा सके।
सरकार के निर्देश के मुताबिक, अभी सप्ताह में पांच दिन उद्योगों को चलाने की अनुमति है। दो दिन श्रमिक घर बैठते हैं। जेनरेटर सेट चलाने पर प्रतिबंध है। इसलिए उत्पादन भी 30 प्रतिशत तक कम हो रहा है। उद्योगों को एक शिफ्ट में चलाना पड़ रहा है इसलिए श्रमिक पलायन करने को मजबूर हैं।
दोगुना वेतन देकर श्रमिकों को लाए थे वापस
2020 में श्रमिकों को लॉकडाउन का दंश झेलना पड़ा था। श्रमिक कड़ी मुश्किलों से गुजरकर अपने घर वापस लौटे थे। श्रमिकों ने उद्यमियों पर उनकी अनदेखी करने के गंभीर आरोप लगाए थे और दोबारा पानीपत में न आने की बात कही थी। लॉकडाउन खत्म होने के बाद श्रमिकों को लेने के लिए बिहार, उत्तर प्रदेश और छत्तीसगढ़ उनके घर पहुंच गए थे। उद्यमी उन्हें स्पेशल बसों में दोगुना वेतन देने का वायदा लेकर वापस लाए थे।
पांच दिन से एक्यूआई 100 से भी कम, फिर भी जेनरेटर सेट चलाने की अनुमति नहीं
पानीपत का एक्यूआई पिछले पांच दिन से 100 से भी कम है। पानीपत की हवा शुद्ध है। बावजूद इसके केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जेनरेटर सेट चलाने पर प्रतिबंध लगाया है। इससे डाइंग यूनिट में काम 30 प्रतिशत तक कम हो रहा है।
बंगाल, यूपी, बिहार व छत्तीसगढ़ रवाना हो रहे श्रमिक
श्रमिक बंगाल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार के रहने वाले श्रमिक ट्रेन, रोडवेज बसों और निजी बसों से अपने-अपने घरों के लिए रवाना हो रहे हैं। मंगलवार रात भी लाल बत्ती के पास से तीन बसें बिहार और बंगाल के लिए रवाना हुई हैं। पेट भरने की चिंता में श्रमिकों में कोरोना संक्रमण का डर नहीं है। वे झुंड बनाकर निजी बसों से जा रहे हैं। बोले, कहीं लॉकडाउन लग गया तो पहले की तरह पैदल ही घर जाना पड़ेगा।
पानीपत में तीन लाख प्रवासी लोग
औद्योगिक नगरी होने के कारण पानीपत में बिहार, बंगाल, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश आदि राज्यों के लोग रह रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पानीपत में करीब तीन लाख प्रवासी मजदूर रह रहा है। पानीपत का उद्योग प्रवासी श्रमिकों पर ही निर्भर करता है।
सीपीसीबी परेशान कर रही है
सीपीसीबी परेशान कर रही है। हमें सप्ताह में पांच दिन ही उद्योगों को चलाने की अनुमति है। जेनरेटर सेट पर प्रतिबंध लगाया है। काम कम हो रहा है इसलिए श्रमिक पलायन कर रहे हैं। -भीम राणा, प्रधान डायर्स एसोसिएशन
कोरोना बढ़ा तो पलायन रोकना मुश्किल होगा
नए साल के बाद लगातार कोरोना के केस एकाएक बढ़ रहे हैं। श्रमिक पलायन करने लगे हैं। उद्यमियों पर दोहरी मार पड़ रही है। सरकार को ऐसे समय में उद्यमियों का साथ देना चाहिए। -रमन छाबड़ा, उद्यमी
हम श्रमिकों के साथ, वे घबराएं नहीं
हम श्रमिकों के साथ है। श्रमिकों से अपील है कि वे घबराएं नहीं। संक्रमण रोकने के लिए कोरोना नियमों का पालन करें। सीपीसीबी से अपील है कि उद्यमियों को परेशान करना बंद करें। -प्रीतम सचदेवा, उद्यमी