एक दिन या फिर पखवाड़ा मनाने से हिंदी को वह दर्जा नहीं मिल सकेगा जो उसे मिलना चाहिए। हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करना चाहिए। हिंदी भाषा हमें स्नेह, ममता, प्रेम, करुणा और प्यार करना सिखाती है। परिवार, समाज को एक कड़ी में बांधकर रखना सिखाती है। हम आज दिनचर्या में भी अंग्रेजी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं, जो देशहित में नहीं है। हिंदी भाषा अच्छी तरह बोलने और लिखने वालों की संख्या दिनों-दिन कम होती जा रही है। हम पचास भाषाएं सीखें, अच्छी बात है, लेकिन हमें मातृभाषा को अधिक प्यार करना चाहिए।
आजकल शिक्षा व्यवस्था खासतौर पर अंग्रेजी विद्यालयों में हिंदी का कोई विशेष महत्व नहीं है। इसकी वजह से बच्चे हिंदी की अहमियत को अच्छे से समझ नहीं पाते। जब कोई युवा नौकरी के लिए जाता है तो उसके सामने सबसे पहले अंग्रेजी बोलने की शर्त रख दी जाती है। इससे युवा पीढ़ी में गलत संदेश जाता है। आज हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम अपने जीवन में हिंदी को महत्वपूर्ण स्थान दें। - अमित जागलान।
हम जिस तरह अपने बच्चे को अंग्रेजी पढ़ाने पर जोर देते हैं, उसी तरह हिंदी पढ़ाने पर भी जोर देना चाहिए। हम अपनी भाषा की उपेक्षा क्यों करते हैं जबकि पश्चिमी देशों में हिंदी पढ़ाए जाने पर हमें गर्व होता है। यह हिंदी के लिए अच्छा है कि आज दुनिया के करीब 115 शिक्षण संस्थानों में इसका अध्ययन हो रहा है। अमेरिका, जर्मनी में भी हिंदी को पढ़ाया जा रहा है। हमें अन्य देशों से सीखना चाहिए कि कैसे वह अपनी भाषा के साथ ही अन्य भाषा को भी अपनाने की कोशिश करते हैं। - प्रवीण कुमार शर्मा।
आज हमारे राष्ट्र में हिंदी दिवस मनाने की नौबत आ चुकी है, जबकि हमारा देश हिंदी प्रधान है। कई लोग इसे बोलने में बेइज्जती महसूस करते हैं। यह विडंबना ही है कि हिंदी भाषा बोलने से कई लोग आज भी हिचकिचाते हैं। सरकारी दफ्तरों में ये स्लोगन लिखे जाने लगे हैं कि हिंदी हमारी राष्ट्रभाषा है। सभी कार्य को हिंदी में ही यथासंभव करने का प्रयास करें। एक दिन तथा एक पखवाड़ा मनाने से हिंदी को वह दर्जा नहीं मिल सकेगा जो उसे मिलना चाहिए, हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करना चाहिए। - राजेश नैन।
हिंदी का हमें ज्यादा से ज्यादा उपयोग करना चाहिए ताकि इसका विकास हो सके। हम आज दैनिक दिनचर्या में भी अंग्रेजी भाषा का प्रयोग कर रहे हैं। इस कारण धीरे-धीरे हिंदी भाषा की स्थिति खतरे में पड़ गई है। इसे अच्छी तरह बोलने और लिखने वालों की संख्या बहुत कम है। इससे भविष्य में भाषा के विलुप्त होने की संभावना है। - संसार पातल्याण।