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Panipat News: एचआईवी संक्रमितों को परिणय सूत्र में बांध रहा स्वास्थ्य विभाग, दे रहा नया जीवन

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पानीपत। स्वास्थ्य विभाग एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डेफिशिएंसी वायरस) पॉजिटिव युवक-युवतियों को मुख्य धारा से जोड़ने के लिए इनकी शादी करा रहा है। पानीपत में अब तक चार जोड़े परिणय सूत्र में बंध चुके हैं और खुशी की बात यह है कि ये चारों जोड़े माता-पिता भी बन चुके हैं। इनके बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं।
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सभी चार जोड़े अपने वैवाहिक जीवन में खुश हैं। बीमारी से लड़ते हुए आम इंसान की तरह अपना जीवन व्यतीत कर रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंताजनक बात यह है कि ट्रांसजेंडर एचआईवी संक्रमितों की संख्या दो साल में कई गुना बढ़ चुकी है। 2021 तक जिले में एक ट्रांसजेंडर एचआईवी संक्रमित था। अब इनकी संख्या 15 पहुंच चुकी है। इसका मुख्य कारण एक से अधिक लोगों के साथ शारीरिक संबंध बनाना है।

स्वास्थ्य विभाग ने एचआईवी मैरिज डॉट कॉम वेबसाइट 2020 में शुरू की थी। इसमें एचआईवी पॉजिटिव अपना रजिस्ट्रेशन नंबर और एचआईवी संक्रमण की मौजूदा स्थिति को बताकर अपने लिए जीवनसाथी खोज सकते हैं। शादी के बाद इन जोड़ों के बच्चे भी सामान्य हों और उनमें माता-पिता के जरिये एचआईवी संक्रमण न हो, इसके लिए उपचार भी किया जाता है। इस वक्त जिले में 2102 एचआईवी पॉजिटिव हैं, जिनमें से लगभग 550 अविवाहित हैं। डॉक्टर इन्हें जागरूक कर रहे हैं। पानीपत से चार जोड़ों का विवाह कराने में स्वास्थ्य विभाग को कामयाबी मिली है। स्वास्थ्य विभाग एचआईवी पॉजिटिव युवक-युवतियों को परिजनों को कॉल कर रिश्ता कराने में सहायता कर रहा है।
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पानीपत में फिलहाल 2102 एचआईवी पॉजिटिव केस स्वास्थ्य विभाग के पास उपचाराधीन हैं, जिसमें 761 महिलाएं और 1274 पुरुष शामिल हैं। 15 ट्रांसजेंडर भी एचआईवी पॉजिटिव हैं। इसके अलावा 52 बच्चे एचआईवी पॉजिटिव हैं। 40 पॉजिटिव मरीजों की मौत भी हो चुकी है।
पानीपत स्वास्थ्य विभाग ने एड्स रोगियों की सिविल अस्पताल में ही जांच और उनकी रिपोर्ट देने के बाद यहीं इलाज शुरू कर दिया है। रिपोर्ट आने के बाद रोगियों की काउंसिलिंग की जाती है। पहले रोगियों की रिपोर्ट लेकर रोहतक भेजा जाता था। वहीं से मरीजों को दवा मिलती थी। अब सिविल अस्पताल में ही ये सेवा शुरू कर दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने अब तक चार पॉजिटिव जोड़ों की शादियां कराई हैं। ये जोड़े खुशहाल जीवन जी रहे हैं। बच्चे पॉजिटिव न हों, इसके लिए पहले ही महिलाओं को दवाएं दी जाती हैं। फिर जन्म के 72 घंटे के अंदर बच्चे को नवेपाप्रिन दवा दी जाती है, जिससे बच्चा संक्रमित नहीं होता है।
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- रविंद्र कुमार, काउंसलर, एचआईवी विंग, स्वास्थ्य विभाग
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