Enquash team asked the cleaning staff - how will you clean if blood falls on the floor
- फोटो : Panipat
पानीपत। कायाकल्प में पिछड़ने के बाद अब पानीपत स्वास्थ्य विभाग की उम्मीद नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट पर टिकी है। इसे हासिल करने का प्रयास कर किया जा रहा है। मंगलवार को कल्पना चावला मेडिकल कॉलेज की टीम निरीक्षण के लिए सिविल अस्पताल में पहुंची। उन्होंने सफाई कर्मियों से पूछा कि फर्श पर खून गिरने पर कैसे साफ करेंगे, जिससे कि फर्श पूरी तरह से संक्रमण मुक्त हो जाए। डॉक्टरों एवं नर्स से मरीजों को मिलने वालीं सुविधाओं के बारे में जाना। इसके साथ ही अनुशासन के बारे में भी जाना गया।
नवंबर में सर्टिफिकेट प्राप्त करने वाले प्रदेश भर के अस्पतालों की लिस्ट जारी होगी। इससे पहले पानीपत सिविल अस्पताल को कायाकल्प में तीसरे स्थान से संतोष करना पड़ा था। करनाल से पहुंची टीम ने कर्मचारियों से साफ-सफाई से लेकर आग लगने पर कैसे काबू पाया जाए सहित कई सवाल पूछे। कर्मचारियों से वैक्सीन लगाने के सही तरीके आदि की जानकारी ली गई। इमरजेंसी वार्ड में काम करने वाले कर्मचारियों से फायर सेफ्टी सिलिंडर चलवाकर देखा गया। टीम ने स्टाफ नर्सों को संक्रमण को खत्म करने संबंधी सवाल पूछे। पीएमओ डॉ. संजीव ग्रोवर एवं डिप्टी एमएस डॉ. अमित पोरिया ने अस्पताल में मरीजों के लिए शुरू की गई बेहतर सेवाओं की जानकारी दी। टीम ने लेबर वार्ड, इमरजेंसी वार्ड, ओपीडी ब्लॉक, कोरोना जांच लैब, एसएनसीयू वार्ड सहित कई जगहों का निरीक्षण किया।
100 में से 70 अंक लेना जरूरी
नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस सर्टिफिकेट यानी एनक्वास के लिए क्वालिफाई तभी कर सकेंगे, जब जांच टीम संतुष्ट होगी। एनक्वास चैक लिस्ट 250 बिंदुओं की है। पूर्व मूल्यांकन करने वाली टीम 100 अंकों में से 70 या इससे अधिक अंक देगी, तभी एनक्वास के लिए आवेदन किया जा सकता है। अस्पताल के अधिकारी अब एनक्वास की चैक लिस्ट पर ही काम कर रहे हैं। सिविल अस्पताल को अगर एनक्वास सर्टिफिकेट मिल जाता है तो बहुत बड़ा फायदा होगा क्योंकि एनक्वास सर्टिफिकेट मिलने के बाद गाइडलाइन के अनुसार प्रत्येक बेड के लिए 10 हजार रुपये प्रतिवर्ष मिलेंगे। अस्पताल में इस समय 200 बेड हैं। मिलने वाले पैसों का 25 प्रतिशत हिस्सा कर्मचारियों के प्रोत्साहन और 75 प्रतिशत रुपये मरीजों की सुविधा पर खर्च किया जाता है।