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Panipat: अदाणी कंपनी के सात कर्मियों व एक वेंडर पर धोखाधड़ी का केस, जाली दस्तावेजों से जमीन हड़पने का आरोप

Mon, 13 Feb 2023 12:28 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, पानीपत (हरियाणा)

सार

गृहमंत्री विज के आदेश पर कार्रवाई हुई है। पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है। पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित किसान ने बताया कि आरोपियों ने उसे कोई पेमेंट नहीं दी, लेकिन फर्जी दस्तावेज कोर्ट में पेश कर दिए।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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हरियाणा के पानीपत के गांव नौल्था के किसान और उसके पिता ने अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स कंपनी के सात कर्मियों और एक स्टांप वेंडर पर जाली दस्तावेज बनाकर करोड़ों रुपये की जमीन हड़पने का आरोप लगाया है। किसान की शिकायत पर पुलिस ने कंपनी के सात कर्मचारियों और एक स्टांप वेंडर के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। 

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पुलिस को दी शिकायत में पीड़ित किसान ने बताया कि आरोपियों ने उसे कोई पेमेंट नहीं दी, लेकिन फर्जी दस्तावेज कोर्ट में पेश कर दिए, जिन्हें किसान ने सबूतों के साथ फर्जी साबित कर दिया। इसके बाद से आरोपी किसान पर समझौता करने का दबाव बना रहे हैं और जान से मारने की धमकी दे रहे हैं।

किसान का कहना है कि उन्होंने पहले भी पुलिस को शिकायत दी थी लेकिन दबाव के चलते पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद पीड़ित ने इसकी शिकायत सीएम और गृहमंत्री को भेजी। गृहमंत्री के निर्देश पर पुलिस हरकत में आई और अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स कंपनी के सात कर्मियों और गुरुग्राम के एक स्टांप वेंडर पर मामला दर्ज किया है। 
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इन पर हुआ केस दर्ज
किसान जितेंद्र और उसके पिता बनी सिंह की शिकायत पर पुलिस ने अदाणी एग्री लॉजिस्टिक्स (पानीपत) लिमिटेड के तीन डायरेक्टर पवन कुमार, पुनीत मेहंदीरत्ता, अमित कुमार समेत आठ लोगों के खिलाफ मामला दर्ज कराया है। आरोपियों में इन डायरेक्टर के अलावा अजय शर्मा, राजीव संधू, राजपाल, अदाणी एग्री लोजिस्टिक्स पानीपत और प्रदीप खन्ना स्टांप वेंडर गुरुग्राम शामिल हैं। जितेंद्र ने बताया कि सभी आरोपी गांव नौल्था में उनकी भूमि पर गोदाम बनाना चाहते हैं। 

विशेषज्ञ की जांच में हस्ताक्षरों का नहीं हुआ था मिलान
आरोपियों ने एक झूठा, फर्जी और बिना मालिक के हस्ताक्षरों के इकरारनामा उनकी जमीन को हड़पने के लिए 11 अक्टूबर 2018 को तैयार किया। दीवानी दावा में दो रसीद 11 सितंबर 2019 और 11 अगस्त 2020 की बनाई। जितेंद्र का कहना है कि वास्तव में न तो इन रसीदों के तहत उसे कोई राशि दी गई है और न ही इन रसीदों और इकरारनामे पर उनके हस्ताक्षर हैं। आरोपियों ने उनकी जमीन को ऐंठने के लिए झूठे दस्तावेज तैयार किए और अदालत में भी इनका इस्तेमाल किया है।

इस बात का उसे तब पता लगा जब आरोपियों द्वारा किया गया दीवानी दावा के बाबत सितंबर 2021 में उसे कोर्ट समन मिला। कोर्ट में पेशी के दौरान जितेंद्र ने इन हस्ताक्षरों को झूठा बताते हुए साफ तौर पर इनकार कर दिया। इतना ही नहीं, कोर्ट के आदेशों पर कागजों पर हुए हस्ताक्षरों की एक्सपर्ट से भी जांच करवाई गई, जिसमें हस्ताक्षरों का मिलान नहीं हुआ। 

केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के कार्यक्रम के लिए करनाल में ड्यूटी लगी है। ये मामला संज्ञान में नहीं है। अगर इस मामले पर रिपोर्ट दर्ज हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच की जाएगी। - इंस्पेक्टर बलराज सिंह, थाना प्रभारी, इसराना।

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