धोखाधड़ी का केस रद्द करने एवज में वकील से दो लाख मांगे थे। एंटी करप्शन ब्यूरो ने सिटी थाना में तैनात एएसआई को गिरफ्तार किया। एसआई ने भी दूसरे केस को रद्द करने के लिए एक लाख मांगे थे, वह फरार है। एसीबी ने दोनों पर केस दर्ज किया है।
करनाल की एंटी करप्शन ब्यूरो टीम ने बुधवार दोपहर को सिटी पुलिस थाना के एएसआई को वकील से एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ा है। एएसआई ने अपने ही थाने के एसआई के साथ मिलकर एक वकील पर दर्ज धोखाधड़ी के केस को खत्म करने के लिए दो लाख रुपये मांगे थे। एक लाख रुपये बुधवार को मंगवाए गए थे। वकील ने इसकी शिकायत करनाल एंटी करप्शन ब्यूरो के एसपी को दी थी।
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टीम ने पानीपत में दबिश देकर एएसआई को रंगेहाथ पकड़ लिया। इस मामले में शामिल एसआई फिलहाल फरार है। एसीबी ने मामले में सिटी थाना पुलिस में एसआई व एएसआई पर केस दर्ज कराया है। एएसआई को गिरफ्तार कर लिया गया है। वीरवार को उसे कोर्ट में पेश किया जाएगा।
करनाल एंटी करप्शन ब्यूरो के प्रभारी इंस्पेक्टर सचिन कुमार ने बताया कि शहर के एक वकील ने एसीबी एसपी स्मृति चौधरी को शिकायत दी थी। उसने बताया था कि शहर थाना पुलिस में उसके खिलाफ दो केस दर्ज किए गए हैं। एक केस में जांच अधिकारी सब इंस्पेक्टर सुभाष व दूसरे में जांच अधिकारी एएसआई प्रमोद हैं। यह केस उसके खिलाफ छह जून को दर्ज किए गए हैं। अब दोनों जांच अधिकारी केस को रद्द करने के लिए उससे दो लाख रुपये मांग रहे हैं। एएसआई प्रमोद ने एक लाख रुपये बुधवार को मांगे हैं।
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उन्होंने बुधवार दोपहर को वकील को एक लाख रुपये दिए। वकील ने एएसआई प्रमोद को रुपये देने के लिए फोन किया। एएसआई प्रमोद ने वकील को पैसे लेकर सिटी पुलिस थाना में बुलाया। एसीबी वकील को लेकर शहर थाना पुलिस पहुंची। यहां पर वकील एसएचओ के कमरे के पीछे वाली साइड में बने कमरे में एएसआई प्रमोद के पास गया और उसने उसे एक लाख रुपये दे दिए। इसी वक्त एसीबी ने उसको धर लिया। उसके बेड पर बिछे गद्दे के नीचे से एक लाख रुपये मिले। उसके पानी में हाथ धुलवाए तो पानी गुलाबी हो गया।
उसे तुरंत हिरासत में लिया गया। इसकी शिकायत पानीपत एंटी करप्शन ब्यूरो को दी गई। पानीपत एसीबी ने एसआई सुभाष व एएसआई प्रमोद पर केस दर्ज किया। एएसआई प्रमोद को वीरवार को कोर्ट में पेश किया जाएगा। एसआई सुभाष की धरपकड़ जारी है।
ये है मामला
सेक्टर 29 पुलिस थाना क्षेत्र निवासी एक व्यक्ति व महिला में घरेलू हिंसा का केस चल रहा था। महिला व ससुर में डील हुई थी कि अगर ससुर 100 गज का प्लॉट एग्रीमेंट पर उसके नाम करा देगा तो वह केस उठा लेगी। ससुर ने 100 गज का प्लॉट एग्रीमेंट पर अपनी बहू के नाम करा दिया। बहू ने इसके बाद भी केस नहीं उठाया। इसके बाद महिला के ससुर ने एएसआई प्रमोद के साथ मिलकर एग्रीमेंट को झूठा बताने के लिए कहानी रची। इस एग्रीमेंट पर वकील के हस्ताक्षर थे। वकील व महिला पर झूठा एग्रीमेंट बनवाने का केस दर्ज किया गया। जांच में एग्रीमेंट सही पाया गया तो वकील ने केस रद्द करने की मांग की । इसके बाद एएसआई प्रमोद ने केस रद्द करने के लिए एक लाख रुपये मांगे थे।