पानीपत। अब निगम के पास आने वाली अत्यंत जरूरी शिकायतों के समाधान के लिए लोगों को इंतजार नहीं करना पड़ेगा। इसके लिए निगम एसई बिना ऑनलाइन टेंडर लगाए या समय व्यर्थ किए अपने कोटे के बजट से ऐसे काम करवा सकेंगेे। इसके लिए सरकार ने निगम के सुपरिंटेंडेंट इंजीनियर को तीन लाख रुपये प्रति डिवीजन प्रति माह खर्च करने की पावर दी है। इसमें एसई एक काम पर अधिकतम एक लाख रुपये तक ही खर्च कर सकेंगे। यानी एक डिवीजन में तीन अत्यंत जरूरी कामों पर एक एक लाख करके अधिकतम तीन लाख रुपये खर्च कर सकते हैं।
अब नगर निगम पानीपत में चार डिवीजन हैं, इसलिए निगम एसई के अधिकतम कुल पावर 12 लाख रुपये प्रतिमाह की बनती है। सबसे खास बात ये रहेगी कि इसके लिए निगम एसई के नाम से अलग से बैंक खाता खोला जाएगा। जिसमें संबंधित काम की राशि को भेजा जाएगा। संबंधित शिकायत पर काम करवाने से लेकर उक्त काम के भुगतान की जिम्मेदारी भी एसई की होगी। वहीं, सरकार ने इसी तर्ज पर नगर परिषद के एक्सईएन को अधिकतम दो लाख रुपये प्रतिमाह और नगर पालिका के एमई को अधिकतम एक लाख रुपये प्रतिमाह की पावर दी है।
यहां आने वाली शिकायतों पर कर सकते हैं खर्च
सरकार की ओर से भेजे गए पत्राचार के अनुसार, निगम के पास आनी वाली सीएम विंडो, ट्वीटर, हरपथ पोर्टल, सरल पोर्टल, स्वच्छ ऐप हरियाणा और आरटीआई एक्ट के अंतर्गत आने वाली शिकायतों पर इस राशि के तहत काम करवाया जा सकता है। ध्यान देने योग्य बात ये है कि निगम इन पर मिलने वाली सभी शिकायतों को इस राशि के तहत समाधन नहीं करवाएगा। निगम के पास इन माध्यमों से आने वाली शिकायतों में से वे चिह्नित की जाएंगी, जो जनता के लिए अत्यंत आवश्यक हैं, जिनका समाधान करवाना बेहद जरूरी है। जिनकी वजह से लोगों का काम प्रभावित हो रहा हो।
शॉर्ट टेंडर, टेंडर नोटिस या ऑफलाइन करवा सकते हैं काम
सरकार की ओर से जारी किए गए निर्देशानुसार निगम एसई ऐसे आवश्यक कामों को बिना ऑनलाइन टेंडर में समय गवाएं शार्ट टर्म टेंडर, टेंडर नोटिस या ऑफलाइन विभागीय कामों के अंतर्गत करवा सकते हैं। इसके लिए एडमिन अप्रूवल भी निगम एसई के पास रहेगी। वहीं, निगम की ओर से एसई के नाम से खोले गए अलग बैंक खाते से ही उक्त काम का भुगतान होगा। इसके लिए दिए जाने वाले पेमेंट माध्यम पर भी एसई के हस्ताक्षर होंगे। यानी इन कामों में निगम आयुक्त का हस्तक्षेप नहीं रहेगा।
नियमानुसार होंगे काम- एसई
सरकार के पत्राचार से ज्यादा जरूरी कामों को तुरंत प्रभाव से करवाने में आसानी रहेगी। पहले हर काम के लिए टेंडर प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था इसमें ज्यादा समय लगता था। अब जनहित की ज्यादा जरूरी शिकायतों का तुंरत प्रभाव से समाधान हो सकेगा।
- रमेश कुमार, एसई, नगर निगम, पानीपत।