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आज रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग का दुर्लभ त्रिवेणी संयोग

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पानीपत। हिंदू धर्म में राम नवमी का त्योहार खास महत्व रखता है। मान्यता है कि चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को राम का जन्म हुआ था। इस वर्ष राम नवमी के अवसर पर कई शुभ योग बन रहे हैं। रविवार को रवि पुष्य योग, सर्वार्थ सिद्धि योग व रवि योग का त्रिवेणी संयोग बन रहा है। इन तीन योगों के कारण इस दिन का महत्व और बढ़ गया है।
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राम नवमी के दिन भगवान श्रीराम के साथ माता सीता, मां दुर्गा व बजरंगबली की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की पूजा करने से भक्त की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। रामनवमी के साथ ही चैत्र नवरात्र का समापन होगा।
श्री अवध धाम मंदिर से ज्योतिषाचार्य पंडित राधे-राधे महाराज ने बताया कि चैत्र शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का प्रारंभ 10 अप्रैल रविवार को देर रात 01 बजकर 23 मिनट पर हो रहा है, जो 11 अप्रैल सोमवार को सुबह 03 बजकर 16 मिनट पर समाप्त होगी। राम जन्मोत्सव का शुभ मुहूर्त 10 अप्रैल को सुबह 11 बजकर 06 मिनट से दोपहर 01 बजकर 39 मिनट तक रहेगा। दिन में प्रभु श्रीराम की पूजा का मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 04 मिनट से दोपहर 12 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। इस साल राम नवमी पर सुकर्मा व धृति योग भी बन रहा है। सुकर्मा योग 11 अप्रैल को दोपहर 12 बजकर 04 मिनट तक रहेगा। इसके बाद धृति योग शुरू होगा। कहते हैं कि इन शुभ योगों में शुरू किए गए कार्यों में सफलता हासिल होती है।
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राम नवमी पर करें केवल ये दो काम, प्रसन्न हो जाएंगे भगवान श्रीराम
ज्योतिषाचार्य पंडित शिवदत्त शास्त्री ने बताया कि प्रभु श्रीराम की कृपा पाने के लिए आप केवल दो काम करें। पूजा के समय श्रीरामावतार और श्रीराम स्तुति का पाठ करें। एक में प्रभु राम के जन्म का उल्लेख और दूसरे में उनकी स्तुति की गई। इसको पढ़ने से भगवान श्रीराम प्रसन्न होंगे। वे आपकी मनोकामनाओं की पूर्ति करेंगे। रामनवमी पर भगवान श्रीराम व माता सीता की पूजा करने के साथ हवन भी किया जाता है। कहते हैं कि रामनवमी के दिन हवन करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं व सुखद वैवाहिक जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
ज्योतिषाचार्य पंडित कृष्णा ने बताया कि रामनवमी पर हवन सामग्री में नीम, पंचमेवा, जटा वाला नारियल, गोला, जौ, आम की लकड़ी, गूलर की छाल, चंदन की लकड़ी, अश्वगंधा, मुलेठी की जड़, कपूर, तिल, चावल, लौंग, गाय की घी, इलायची, शक्कर, नवग्रह की लकड़ी, आम के पत्ते, पीपल का तना, छाल, बेल, आदि को शामिल करना चाहिए।
हवन विधि-
पंडित राम नारायण शास्त्री ने बताया कि राम नवमी के दिन व्रती को सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर साफ- स्वच्छ वस्त्र पहनने चाहिए। इसके बाद हवन के लिए साफ-सुथरे स्थान पर हवन कुंड का निर्माण कर करना चाहिए। अब गंगाजल का छिड़काव कर सभी देवताओं का आह्वान करें। अब हवन कुंड में आम की लकड़ी और कपूर से अग्नि प्रज्जवलित करें। इसके बाद हवन कुंड में सभी देवी-देवताओं के नाम की आहुति डालें। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हवनकुंड में कम से कम 108 बार आहुति डालनी चाहिए। हवन समाप्त होने के बाद भगवान राम और माता सीता की आरती उतारनी चाहिए।
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ये शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:31 बजे से 05:16 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त- सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक।
विजय मुहूर्त- दोपहर 02:30 बजे से 03:21 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:31 बजे से 06:55 बजे तक।
अमृत काल- रात 11:50 बजे से 01:35 बजे तक।
रवि पुष्य योग- पूरे दिन
सर्वार्थ सिद्धि योग- पूरे दिन
रवि योग- पूरे दिन
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