पानीपत। कोरोना की तीसरी लहर में ग्रामीण क्षेत्र के लोग अधिक संक्रमित हुए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 22 दिसंबर 2021 से अब तक कोरोना के 3760 केस मिले हैं। इनमें ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वालों की संख्या 2010 और 1750 लोग शहरी हैं। कोरोना की पहली व दूसरी लहर में शहरी क्षेत्रों के लोग ज्यादा संक्रमित हुए थे।
तीसरी लहर में ग्रामीणों का अधिक संक्रमित होने का कारण जागरूकता की कमी रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में कोविड के नियमों का सख्ती से पालन नहीं हुआ। शहरी क्षेत्रों में प्रशासन की थोड़ी सख्ती जरूर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में सबसे अधिक संक्रमित रिफाइनरी टाउनशिप, समालखा व इसराना क्षेत्र रहा है। इन तीनों क्षेत्रों से कोरोना के 450 से अधिक केस दर्ज हो चुके हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में पांच स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी भी हुए संक्रमित
ग्रामीण क्षेत्रों के स्थित स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी व उनका स्टाफ भी कोरोना से नहीं बच पाया है। समालखा अस्पताल के एसएमओ समेत वहां के चार स्वास्थ्य कर्मचारी कोरोना संक्रमित हुए। नौल्था सीएचसी प्रभारी, काबड़ी पीएचसी प्रभारी, ददलाना सीएचसी प्रभारी व रेरकलां पीएचसी प्रभारी कोरोना संक्रमित हो चुके हैं।
20 मरीजों में एक बच्चा शामिल
कोरोना की तीनों लहर में अब तक 16 साल से कम आयु के 4710 बच्चे कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। गनीमत है कि बच्चों का रिकवरी रेट 100 प्रतिशत है। 16 साल से कम आयु के किसी बच्चे की कोरोना से अब तक मौत नहीं हुई है। कोरोना की तीसरी लहर में अब तक 16 साल से कम आयु के 232 बच्चे कोरोना संक्रमित हो चुके हैं। 20 मरीजों में एक बच्चा कोरोना संक्रमित मिल रहा है।
पहली लहर में 1250 बच्चे हुए थे कोरोना संक्रमित
जिले में पहला कोरोना का केस आठ मार्च 2020 को दर्ज किया गया था। कोरोना की पहली लहर में 1250 बच्चे कोरोना संक्रमण का शिकार हुए थे। दूसरी लहर में 3270 बच्चे कोरोना की चपेट में आए। इस तीसरी लहर में अब तक 232 बच्चे कोरोना की चपेट में आए हैं। सबसे अधिक बच्चे रिफाइनरी टाउनशिप में कोरोना संक्रमित मिले हैं। यहां रहने वाले अधिकतर परिवार बाहर घूमकर लौटे और यहां जांच कराने पर वो कोरोना संक्रमित मिले।
लगभग 90 गांवों के 90 प्रतिशत लोग लगवा चुके हैं टीका
शहरी क्षेत्रों के मुुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में टीकाकरण के प्रति जागरूकता अधिक रही है। जिले के 90 ऐसे गांव है जहां 90 प्रतिशत लोगों को टीके की दोनों डोज लग चुकी है। 60 ऐसे गांव है जहां लगभग 20 हजार लोगों को दूसरी डोज नहीं लगी है। शहरी क्षेत्रों के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों में एंटीबॉडी अधिक विकसित हुई है।