पानीपत। डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया और डायरिया के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग तीन मोबाइल मेडिकल यूनिट को उतारने जा रहा है। ये यूनिट गांव-गांव जाकर लोगों के स्वास्थ्य की जांच करेंगी और मौके पर जांच कर रिपोर्ट देंगी। इसके साथ ही उन्हें इलाज भी मुहैया कराया जाएगा। जो मरीज दूरी की वजह से सिविल अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र नहीं जा पाते हैं, उन्हें बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के लिए विभाग ने यह कदम उठाया है।
एक मेडिकल यूनिट में एक डॉक्टर, स्टाफ नर्स, लैब टेक्नीशियन और फार्मासिस्ट होगा। अगर किसी मरीज की हालत गंभीर होने पर सिविल अस्पताल में लाने की जरूरत है तो डॉक्टर मौके पर ही पर्ची देकर उन्हें रेफर करेंगे। इसके साथ ही टीम बीमारियों से बचाव के प्रति लोगों को जागरूक भी करेगी। यूनिट में सीएचसी स्तर की लैब भी होगी। स्वास्थ्य विभाग ने ऐसी तीन यूनिट तैयार की हैं। उनका मकसद है कि उन गांवों तक इलाज पहुंचाया जाए, जहां पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक नहीं है।
झोलाछाप पर नकेल कसने में मिलेगी कामयाबी
स्वास्थ्य विभाग तीन मोबाइल मेडिकल यूनिट फील्ड में उतारकर झोलाछाप पर भी नकेल कस रहा है, क्योंकि बाहरी क्षेत्रों में जागरूकता की कमी से लोग इनके जाल में फंसे रहते हैं। ये अयोग्य खुद के डॉक्टर होने का दावा कर लोगों को डेंगू एवं मलेरिया के नाम पर लूटते हैं। स्वास्थ्य विभाग को ऐसी शिकायतें मिल रही हैं। इसलिए मोबाइल मेडिकल यूनिट झोला छापों पर नकेल भी कसेगी, क्योंकि लोग सही डॉक्टर से इलाज करा सकेंगे।
बापौली और समालखा क्षेत्र पर ध्यान है केंद्रित
स्वास्थ्य विभाग का ध्यान बापौली एवं समालखा के 60 गांवों पर केंद्रित रहेगा। इन ब्लॉक के गांवों में जागरूकता की काफी कमी है। इन्हीं क्षेत्रों से डेंगू, काला पीलिया और टीबी के अधिक रोगी मिलते हैं। विभाग सबसे पहले यमुना के तटीय गांवों में यूनिट उतारेगा और लोगों की जांच करेगा।
तीन मोबाइल मेडिकल यूनिट हैं, जल्द उतारेंगे फील्ड में : डॉ. नवीन
पानीपत को तीन मोबाइल मेडिकल यूनिट मिली हैं। ये यूनिट गांव-गांव जाकर मरीजों की जांच करेगी। उन्हें बीमारियों से बचाव के प्रति जागरूक करेंगी। जिन क्षेत्रों से लोग अस्पताल में इलाज के लिए नहीं आ पाते वहां पहुंचना विभाग का लक्ष्य है।
- डॉ. नवीन सुनेजा, डिप्टी सिविल सर्जन