पानीपत। गर्मी बढ़ने के साथ डायरिया का खतरा भी बढ़ गया है। सिविल अस्पताल में हर रोज डायरिया की ओपीडी 10 से अधिक पहुंच गई है। इनके अलावा इमरजेंसी वार्ड में भी प्रतिदिन डायरिया के पांच- छह मरीज आ रहे हैं। मई में अब तक डायरिया के 50 से अधिक मरीज आ रहे हैं। इनमें अधिकतर की उम्र 14 साल से कम है।
डायरिया का मुख्य कारण दूषित जल भी है। शहर की बाहरी कॉलोनियों में डायरिया के मरीज अधिक मिल रहे हैं। लोग बाहरी खाने से डायरिया से ग्रस्त हो रहे हैं। अब सिविल सर्जन डॉ. जयंत आहूजा ने सभी स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारियों को अपने अपने केंद्र में ओआरएस वार्ड बनाने के निर्देश दिए हैं, जहां डायरिया के मरीजों का इलाज होगा। इमरजेंसी मेडिसिन डॉ. सुखदीप कौर ने बताया कि गर्मी में अक्सर डायरिया के केस बढ़ते हैं। अब हर इमरजेंसी वार्ड में डायरिया के पांच-छह से अधिक केस मिल रहे हैं। इनमें बच्चों की संख्या अधिक है। डायरिया का मुख्य कारण दूषित पानी का सेवन भी है। हमें इस मौसम में बाहर जाने से बचना चाहिए। इन्फेक्शन डायरिया के इलाज के साथ डी-हाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी होना) की स्थिति से बचने के लिए खूब पानी पिएं।
डायरिया के लक्षण-
-उल्टी-दस्त और पल्स मंद होना।
-बेचैनी और स्वभाव चिड़चिड़ा होना।
-धंसी हुई आंखें, कमजोरी महसूस होना।
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बीमारी से बचने के उपाय
-डॉक्टर से तुरंत परामर्श लें।
-उबला हुआ पानी ठंडा करके पिएं।
-खुले में बिकने वाली चीजें न खाएं।
-गन्ने का रस पीने से बचें।
-बासी भोजन बिल्कुल न खाएं।
-तेज धूप से बचाव करें।
-साफ-सफाई का ख्याल रखें।
-भोजन करने से पहले साबुन से हाथ धोएं।
-शरीर में पानी की कमी न होने दें।
-प्यास लगने पर ओआरएस घोल का सेवन करें।