पानीपत। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि गुरुओं ने समाज और देश की रक्षा के लिए बलिदान दिया था। उन्होंने गुरुओं के त्याग और बलिदान की कहानी भी सुनाई। कहा कि जब 500 कश्मीरी पंडितों का एक जत्था श्री गुरु तेग बहादुर जी के पास आनंदपुर साहिब पहुंचा और औरंगजेब के अत्याचार से अवगत करवाया। तब गुरु साहिब जी ने कहा कि वक्त आ गया है, जब किसी महापुरुष को बलिदान देना होगा। इस पर गुरु साहिब के पुत्र ने कहा कि आपसे बड़ा बलिदानी कौन होगा। इसके बाद गुरु साहिब जी ने औरंगजेब को चुनौती दी, जिसके बाद अत्याचारी शासक औरंगजेब ने गुरु साहिब को घोर यातनाएं देकर उनका शीश धड़ से अलग कर दिया। गुरु साहिब जी ने देश-धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राणों का बलिदान दे दिया।
हरियाणा से रहा गुरु साहिब का गहरा नाता
मुख्यमंत्री ने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी का हरियाणा से गहरा नाता रहा है। उन्होंने हरियाणा और पंजाब से होकर छह यात्राएं कीं। गुरु साहिब ने हरियाणा के 32 गुरुद्वारों में अपने चरण रखे। गुरु जी धमतान साहिब, मंजी साहिब, गढ़ी साहिब, कराह साहिब आदि स्थानों पर पहुंचे। गुरु साहिब के शीश की अंतिम यात्रा भी हरियाणा से होकर निकली। उन्होंने कहा कि जब गुरु साहिब के शीश के पीछे औरंगजेब की सेना लगी तो गुरु जी के चेहरे से मिलते-जुलते सोनीपत के बड़खालसा गांव के किसान खुशहाल सिंह दहिया ने अपना शीश कटवा दिया था, जिसे लेकर औरंगजेब की सेना दिल्ली चली गई। फिर गुरु साहिब का शीश पंजाब ले जाया जा सका।
आजादी के बाद भी कश्मीरी पंडितों पर अत्याचार हुए
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि गुरुओं के त्याग और संघर्ष की तरह भारत को अंग्रेजी हुकूमत से आजाद करवाने के लिए देश के क्रांतिकारियों ने भी बलिदान दिया है। 1947 में देश आजाद होने के बाद भी कश्मीर पंडितों पर भी अत्याचार हुए, जिसे हम कश्मीर फाइल्स फिल्म में देख सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने धारा-370 हटाकर एक देश, एक विधान, एक निशान का सपना साकार किया।
नायकों को याद रखना होगा : सीएम
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि देश में नायक भी हुए और खलनायक भी, लेकिन हमें नायकों को याद रखना होगा। श्री गुरु तेग बहादुर जी एक नायक थे और औरंगजेब खलनायक था। इसी तरह त्रेता युग में रावण एक खलनायक था जबकि प्रभु श्री राम नायक हुए। इन महापुरुषों ने अत्याचार, धर्म और संस्कृति की रक्षा के लिए कोई समझौता नहीं किया।