बिजली निगम के उपभोक्ता कष्ट निवारण संघ यानी सीजीआरएफ टीम ने बुधवार को लघु सचिवालय के पास सेक्टर 6 के 33 केवी सब स्टेशन में खुला दरबार लगाया गया। इसमें शिकायत नंबर के साथ आए प्रार्थियों की चार शिकायतें सुनी गई। इनमें एक व्यक्ति को दोपहर एक बजे का समय दिया गया था। वह चार मिनट पहले 12:56 बजे आ गया तो खाली बैठे अधिकारी बोले- जाओ बाहर खड़े हो जाओ। फिर उसे करीब आधा घंटा इंतजार करना पड़ा।
उपभोक्ता प्रदीप को अधिकारियों ने खुले दरबार में आने के लिए दोपहर एक बजे का समय दिया था। वे 12 बजकर 56 मिनट पर कार्यालय में अधिकारियों के समक्ष पहुंच गए। शिकायकर्ता कम होने की वजह से अधिकारी खाली ही बैठे थे। उनसे अधिकारियों ने पूछा कि उन्हें किस समय बुलाया गया था। प्रदीप ने जवाब दिया कि उन्हें एक बजे का समय मिला था। इस पर अधिकारी बोले कि अभी चार मिनट बाकी हैं, बाहर खड़े हो जाओ, जब बुलाया जाए तब आना। इसके बाद प्रदीप को एक बजकर 25 मिनट पर बुलाया गया और आश्वासन के बाद लौटा दिया गया।
इस खुले दरबार में आई चार शिकायतों में से तीन का मौके पर समाधान किया गया और एक का केस बनाकर एसडीओ को सौंपा गया। मौके पर आई सभी शिकायतें गलत बिजली बिल से संबंधित रही। इस दौरान सीजीआरएफ चेयरमैन समेत निगम की सभी डिविजन के एक्सईएन व एसडीओ भी मौजूद रहे।
ये आया अजीबो गरीब केस
सेक्टर 25 के मलिक एन्कलेव निवासी प्रदीप जैन ने बताया कि उनके घर पर पिछले सात साल से रिहायशी मीटर लगा था। जिसका बिल वे समय पर भरते आ रहे थे। 2019 में उनके मीटर की डिस्पले खराब हो गई। शिकायत पर मीटर को बदल दिया गया। फिर से वे हमेशा की तरफ अपना बिल समय पर भरते गए।
इसके बाद निगम ने 2021 में दो साल बाद उन्हें 50 हजार रीडिंग का चार लाख रुपये बकाया बिल भेज दिया। उन्होंने इसे गलत बताया और इसकी शिकायत की। शिकायत पर उनका बिजली कनेक्शन तक काट दिया गया। उन्हें निगम की निर्धारित लैब में मीटर चेकिंग के लिए कभी रोहतक, कभी करनाल तो कभी कैथल ले जाया गया लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं निकला। उन्होंने बताया कि उनसे बकाया बिल के नाम पर सरचार्ज तक वसूल किया जा रहा है। इस हिसाब से उन पर इस बकाया बिल का लाखों रुपये का ब्याज तक लग चुका है। निगम ने इसकी एवज में उनसे डेढ़ लाख रुपये तक भरवा लिए।
कोर्ट केस, दो साल से लंबित केस की नहीं हुई सुनवाई
सीजीआरएफ चेयरमैन ने बताया कि खुले दरबार में दो साल से लंबित केस, बिजली चोरी के केस, कोर्ट केस की शिकायतें खुले दरबार में नहीं सुनी जाएंगी। इसे लेकर पहले ही सूचना दी जा चुकी है। यहां केवल वही शिकायतें सुनी जाएंगी जो पहले एसडीओ या एक्सईएन कार्यालय से होकर आई हों।