पानीपत के मतलौडा में हरियाणा शिक्षा बोर्ड अपने विद्यार्थियाें की पढ़ाई और भविष्य के लिए कितना गंभीर है इसका ताजा उदाहरण हाल ही में देखने को मिला।
प्रथम सेमेस्टर की किताबें उस समय स्कूलों में पहुंची जब पहले की परीक्षा समाप्त होने के बाद दूसरे की पढ़ाई शुरू हो गई। इतना ही नहीं हरियाणा बोर्ड के बजाय सीबीएसई बोर्ड की किताबें भेज दीं। यह घोर लापरवाही अध्यापकों और विद्यार्थियाें के लिए परेशानी का कारण बन गई है।
हरियाणा शिक्षा बोर्ड की ओर से सर्वशिक्षा अभियान के तहत राजकीय स्कूलों में भेजी गई छठी कक्षा की रुचिरा नाम की संस्कृत की किताब सीबीएसई बोर्ड की है। इस बात का खुलासा आज उस समय हुआ जब परीक्षाओं से निपट कर अध्यापक मतलौडा के राजकीय सीनियर सेकेंडरी स्कूल में दूसरे सेमेस्टर की पढ़ाई शुरू करा रहे थे। अन्य स्कूलों में भी दूसरे सेमेस्टर की पढ़ाई शुरू हो गई। है।
पढ़ाई के दौरान अध्यापकों ने इस किताब को हरियाणा शिक्षा बोर्ड के सिलेबस से मिलाया तो पाया कि यह किताब सीबीएसई बोर्ड की है। इस किताब के प्रथम तीन अध्याय एक जैसे हैं। कुल 16 अध्यायों में मात्र छह अध्याय ही आगे पीछे मिले है। बाकी नौ अध्याय सिलेबस से बाहर के है। यहां मौजूद अध्यापकों ने नाम न छापने की शर्त पर यह जानकारी दी और पुरानी और नई दोनों ही किताबों में भिन्नता दिखाई। दिलचस्प बात यह है कि किताबाें पर मोहर हरियाणा शिक्षा बोर्ड की लगी है।
वर्जन
यह बात अब तक उनके नोटिस में नहीं आई है और आज वे छुट्टी पर भी हैं। वीरवार को कार्यालय आकर इसकी पड़ताल करेंगे और आगे की कार्रवाई भी करेंगे।
नसीब सिंह, बीईईओ