हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लॉकडाउन के पहले और बाद दर्ज वायु प्रदूषण के आंकड़ों का विश्लेषण किया। जिसमें पाया गया कि वर्ष 2020 में कोविड-19 की दूसरी लहर के दौरान लगे लॉकडाउन में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 47.17 प्रतिशत तक घट गया। वहीं पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर के लॉकडान की तुलना करें तो एक्यूआई में 52.66 प्रतिशत तक की कर्मी दर्ज की गई।
ये कमियां प्रदेश के जिले में दर्ज की गईं अधिकतम थीं। इसके अलावा जिलों के एक्यूआई में आईं न्यूनतम कमियों को भी दर्ज किया गया। दूसरी लहर के लॉकडाउन में एक्यूआई में आई न्यूनतम कमी 6.98 प्रतिशत थी। वहीं पहली लहर के मुकाबले एक्यूआई में न्यूनतम कमी पानीपत में -29.61 प्रतिशत दर्ज की गई। प्रतिशत माइनस में होने का मतलब के पानीपत में पहली लहर के मुकाबले दूसरी लहर के लॉकडाउन में हवा बेहतर होने के बजाए खराब हुई। विश्लेषण के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से प्रदेश के हर जिले के प्रतिदिन के वायु प्रदूषण के आंकड़ों का औसत निकाला गया। इन औसत आंकड़ों के आधार पर ही एक्यूआई के घटने या बढ़ने के प्रतिशत की गणना की गई।
दूसरी लहर में सबसे ज्यादा अंबाला और करनाल की हवा हुई बेहतर
दूसरी लहर के दौरान जीटी बेल्ट में अंबाला और करनाल की हवा काफी बेहतर हुई। पहले और फिर लॉकडाउन के बाद दर्ज आंकड़ों के मुताबिक पानीपत में 20.13, अंबाला में 39.61, यमुनानगर 32.55, कैथल 27.86, करनाल 35.30 और कुरुक्षेत्र 28.32 प्रतिशत हवा बेहतर हो गई। वहीं सबसे ज्यादा धारूहेड़ा में 47.17 और सबसे कम सिरसा में 6.98 प्रतिशत हवा बेहतर हुई।
लॉकडाउन में पानीपत की वायु नहीं हुई शुद्ध
पहली के मुकाबले दूसरी लहर के लॉकडाउन में पानीपत की हवा बेहतर नहीं हुई। क्योंकि इसे -29.61 प्रतिशत दर्ज किया गया। यानि पहले लॉकडाउन में जितनी हवा बेहतर हुई, 29.61 प्रतिशत नीचे आ गई। हालांकि जीटी बेल्ट में इस दौरान हवा और बेहतर हुई। यमुनानगर में 22.75, अंबाला में 27.63, कैथल में 31.67, करनाल में 21.39 और कुरुक्षेत्र में 25.71 प्रतिशत की बेहतरी दर्ज की गई। प्रदेश की बात करें तो इस दौरान पानीपत सबसे नीचे रहा जबकि बल्लभगढ़ हवा में 52.66 प्रतिशत सुधार के साथ सबसे ऊपर रहा।
पीएम-10 में 64.65 और पीएम-2.5 में 54.33 प्रतिशत की कमी
हवा में प्रदूषण की मात्रा को सूक्ष्य कणों के आधार पर मापा जाता है। इसमें दो कण पीएम-2.5 और पीएम-10 मापे जाते हैं, जो नाक के जरिए जाकर इंसान के शरीर को नुकसान पहुंचाते हैं। पानीपत के पीएम-2.5 में 38.17 एवं पीएम-10 में 30.36 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। इसके साथ अंबाला में पीएम-2.5 में 44.30 एवं पीएम-10 में 47.62, यमुनानगर में पीएम-2.5 में 44.69 एवं पीएम-10 में 34.81, कैथल के पीएम-2.5 में 34.58 एवं पीएम-10 में 35.44, करनाल के पीएम-2.5 में 41.12 एवं पीएम-10 में 30.20 और कुरुक्षेत्र के पीएम-2.5 में 39.09 एवं पीएम-10 में 33.01 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
वर्जन:
लॉकडाउन के दौरान वाहनों और फैक्टरियों के नहीं चलने प्रदूषण में कमी दर्ज की गई। पानीपत औद्योगिक क्षेत्र होने के बाद भी यहां पर हवा शुद्ध रही। - कमलजीत सिंह, क्षेत्राधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड