माई सिटी रिपोर्टर
पानीपत। औद्योगिक इकाइयों और चिमनियों पर रखी जाएगी पैनी नजर, उल्लंघन करने वालों पर वीडियो साक्ष्य के साथ होगी सख्त कार्रवाई। वायु गुणवत्ता में सुधार और प्रदूषण नियंत्रण को लेकर जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि पर्यावरण संरक्षण सर्वोच्च प्राथमिकता है और प्रदूषण फैलाने वाली गतिविधियों के खिलाफ किसी भी स्तर पर कोई नरमी नहीं बरती जाएगी।
दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में वायु प्रदूषण की रोकथाम को लेकर बुधवार को केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एनसीआर के अधिकारियों व उपायुक्त के साथ समीक्षा बैठक की। उपायुक्त डॉ. हरीश कुमार वशिष्ठ ने वीसी के बाद जिला अधिकारियों के साथ बैठक की। इसमें अब तक की कार्रवाई की समीक्षा की और आगामी रणनीतियों पर चर्चा की।
खुले में कचरा और पराली जलाने पर तुरंत होगी कार्रवाई
उपायुक्त ने बैठक में निर्देश दिए कि जिले में खुले में कचरा, फसल अवशेष (पराली) या कोई अन्य सामग्री जलाने की घटना किसी भी सूरत में नहीं होनी चाहिए। बर्निंग की सूचना मिलते ही संबंधित विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंचें और कार्रवाई अमल में लाए। उन्होंने कहा कि प्रदूषण के केवल ऊपरी लक्षणों पर नहीं, बल्कि उसके मूल स्रोतों तक पहुंचकर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित किया जाए।
चिमनियों की वीडियो रिकॉर्डिंग और जांच के निर्देश
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को औद्योगिक इकाइयों और उनकी चिमनियों की नियमित निगरानी करने के आदेश दिए गए हैं। उपायुक्त ने कहा कि जहां भी धुएं या अपशिष्ट का उल्लंघन मिले, वहां वीडियो रिकॉर्डिंग सहित तथ्यात्मक रिपोर्ट तैयार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। गंदे पानी को खुले में बहाने की शिकायतों पर भी तुरंत जांच कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
धूल नियंत्रण और जनभागीदारी पर जोर
सड़कों की धूल, निर्माण व तोड़फोड़ से उड़ने वाली धूल और कचरा प्रबंधन को दुरुस्त करने के लिए विभागीय कमेटियों का गठन किया जाएगा। उपायुक्त ने कहा कि स्वच्छ वातावरण के लिए आमजन, औद्योगिक संगठनों और आरडब्ल्यूए की भागीदारी जरूरी है। बैठक में निगम आयुक्त डॉ. पंकज यादव, एचएसवीपी के ईओ प्रतीक हुड्डा, एसएचपीसीबी के आरओ भूपेंद्र चहल उपस्थित रहे।