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35 किमी का सफर खतरनाक, हर साल जाती हैं कई जान

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पानीपत। रिफाइनरी से लेकर समालखा तक करीब 35 किलोमीटर का क्षेत्र दिल्ली पैरलल नहर से लगता है। ये सफर बेहद खतरनाक है। जरा सा ध्यान भटका नहीं कि जान गंवानी पड़ती है। हर वर्ष इस नहर में गिरकर सात से आठ लोगों की जान चली जाती है। इस मार्ग पर प्रशासन 15 वर्ष बाद भी ग्रिल नहीं लगा सका है। हादसे होने पर प्रशासनिक बैठक होती है लेकिन इसका हल नहीं निकलता।
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बीते एक वर्ष में हुईं 10 मौत, इस वर्ष अब तक गईं चार जान
बुधवार की रात गांव बुड़शाम के पास दिल्ली पैरलल नहर में फिर हादसा हुआ। तीन युवकों की जान चली गई। बीते एक वर्ष में नहर में वाहन गिरने की वजह से 10 मौत हो चुकी हैं। इस वर्ष यह चौथी मौत हो। कार अनियंत्रित होकर नहर में गिरती और जान चली जाती है।
इन जगहों पर होते हैं सबसे ज्यादा हादसे
गांव गढ़ी सिकंदरपुर, नारायणा, बुड़शाम, बतरा कालोनी के सामने, असंध नाका चौकी के पास जाटल रोड के पास, पानीपत-रोहतक हाईवे के नजदीक, बिंझौल म्यूजियम और सिवाह पुल के पास नहर में सबसे ज्यादा वाहन गिरते हैं।
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सिवाह बाईपास पर है अंधा मोड़, साइन बोर्ड तक नहीं
करनाल की ओर से आने के दौरान सिवाह बाईपास पर दिल्ली पैरलल नहर के बायीं ओर सड़क खत्म हो जाती है। इसके बाद पुल पार करके नहर के दूसरी ओर जाना होता है। यहां पर सड़क खत्म होने और मुड़ने के लिए कोई साइन बोर्ड नहीं है। पुल की बाउंड्री भी छोटी है। रात के समय इसका अंदाजा नहीं लगता और पहली बार इस मार्ग पर आने वालों के लिए खतरा दोगुना हो जाता है।
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बीते एक वर्ष में हुए हादसे
2022 :
नौ फरवरी - गांव बुड़शाम के पास नहर में कार गिरने से तीन युवकों की मौत
पांच फरवरी - गांव नामुंडा के पास दंपति की कार नहर में गिरी, पत्नी की मौत
2021:
25 दिसंबर - गांव दिवाना के पास 12वीं के विद्यार्थी की नहर में गिरने से मौत
दिसंबर - किसान आंदोलन में जाने के दौरान कार गिरने से दो किसानों की मौत
29 जनवरी- दिल्ली से इंटरव्यू देकर लौट रहे दो युवकों की कार नहर में गिरने से मौत
20 जनवरी - गांव नारायणा के पास नहर में कार गिरने से व्यापारी की मौत
जून - रिफाइनरी के पास सेल्फी लेते हुए एक युवक की नहर में गिरने से मौत
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