महात्मा गांधी स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ पंजाब एडमिनिस्ट्रेशन के ऑडिटोरियम में हुए सम्मेलन में बाल विवाह के समूल उन्मूलन को लेकर गहन विचार-विमर्श हुआ। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 के ताजा आंकड़े भी साल 2011 की जनगणना के आंकड़ों की तस्दीक करते हैं।
सर्वे के अनुसार देश में 20 से 24 साल की उम्र की 23.3 प्रतिशत महिलाएं ऐसी हैं, जिनका बाल विवाह हुआ है। वहीं, राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश में साल 2019 में छह, साल 2020 में 13 और साल 2021 में आठ मामले बाल विवाह के दर्ज किए गए। इस मौके पर सामाजिक सुरक्षा महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक माधवी कटारिया, पंजाब स्टेट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी के सदस्य व जिला एवं सत्र न्यायालय के न्यायाधीश अरुण गुप्ता, एडीजीपी (कम्युनिटी अफेयर्स, डिवीजन एंड क्राइम अगेंस्ट चाइल्ड एंड वुमन) गुरप्रीत देव, केएससीएफ की कार्यकारी निदेशक ज्योति माथुर समेत कई गण्यमान्य लोग मौजूद रहे।
बाल विवाह पर चिंता जाहिर करते हुए सामाजिक सुरक्षा महिला एवं बाल विकास विभाग की निदेशक माधवी कटारिया ने कहा कि विभाग ने कोरोना महामारी के दौरान 32 बाल विवाह रुकवाए थे।
परिवार और समाज का सहना पड़ा विरोध
इस अवसर पर खुद का बाल विवाह रुकवाने वाली लड़की रीता भी मौजूद थीं। अब 20 साल की हो चुकी रीता ने अपने बाल विवाह को रुकवाने के दौरान सामने आई चुनौतियों के बारे में बताया। रीता ने बताया कि उसे न केवल परिवार का बल्कि समाज के विरोध का भी सामना करना पड़ा। हालांकि वह इस सबके बावजूद हिम्मत करके अपना बाल विवाह रुकवाने में कामयाब रही।