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पंजाब: पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी की रिहाई के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करेगा विजिलेंस ब्यूरो

Sun, 22 Aug 2021 02:02 AM IST
पंचकुला ब्‍यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़

सार

प्रवक्ता ने बताया कि एफआईआर नंबर 11 और एफआईआर नंबर 13 आपराधिक गतिविधियां अलग-अलग हैं। दूसरा पक्ष यह है कि हाईकोर्ट के 11 अक्तूबर 2018 और 23 सितंबर 2020 को दिए सुरक्षा आदेश इस विशेष मामले पर लागू नहीं होते।
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पंजाब के पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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पंजाब विजिलेंस ब्यूरो धोखाधड़ी के मामले में पूर्व डीजीपी सुमेध सैनी की 19 अगस्त को जारी रिहाई के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करेगा। इसके साथ ही एक अन्य याचिका के जरिये पूर्व डीजीपी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में 12 अगस्त को अदालत से मिली अंतरिम जमानत के आदेश पर भी पुनर्विचार की अपील की जाएगी।

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सैनी को 18 अगस्त को भूमि धोखाधड़ी मामले एफआईआर नंबर 11 के तहत गिरफ्तार किया गया था। इस समय सैनी आय से अधिक संपत्ति मामले एफआईआर नंबर 13 के तहत रात 8 बजे जांच में शामिल होने के लिए विजिलेंस ब्यूरो के कार्यालय में पहुंचे थे। सैनी ने हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार 7 दिन के अंदर एफआईआर नंबर 13 के मामले की जांच में शामिल होना था। इसी के मद्देनजर मिली अंतरिम

ब्यूरो के प्रवक्ता ने कहा कि पूर्व डीजीपी सात दिन की समय-सीमा के आखिरी दिन देर शाम विजिलेंस दफ्तर पहुंचे थे। इससे स्पष्ट होता है कि सैनी हाईकोर्ट के आदेश का यथावत पालन करने में असफल रहे और जानबूझ कर 7 दिन की समयसीमा के दौरान एफआईआर नंबर 13 के मामले में उपस्थित होने के आदेश के बाद ब्यूरो कार्यालय पहुंचे। साथ ही सेक्टर-68 मोहाली स्थित ब्यूरो के कार्यालय में जांच अधिकारी (आईओ) को बिना किसी पूर्व जानकारी दिए ही पहुंच गए। इन हालात को देखते हुए ब्यूरो ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में अंतरिम जमानत के आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट के सामने पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला किया है।
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पुनर्विचार याचिका के लिए अपेक्षित आधार तैयार
प्रवक्ता ने कहा कि भूमि धोखाधड़ी के मामले में सुमेध सैनी को रिहा करने के हाईकोर्ट के आदेश पर पुनर्विचार याचिका का अपेक्षित आधार भी तैयार किया गया है। सबसे पहले सैनी को एफआईआर नंबर 13 (जिसमें अंतरिम जमानत मिली थी) के अधीन नहीं, बल्कि एफआईआर 11 से संबंधित मामले में हिरासत में लिया गया था। इसमें सैनी को गिरफ्तारी से कोई सुरक्षा नहीं थी।

प्रवक्ता ने बताया कि एफआईआर नंबर 11 और एफआईआर नंबर 13 आपराधिक गतिविधियां अलग-अलग हैं। दूसरा पक्ष यह है कि हाईकोर्ट के 11 अक्तूबर 2018 और 23 सितंबर 2020 को दिए सुरक्षा आदेश इस विशेष मामले पर लागू नहीं होते।

ये आदेश सेवाकाल के दौरान अधिकारी द्वारा किए गए किसी भी अपराध पर गिरफ्तारी से पहले 7 दिन का नोटिस देने संबंधी हैं। प्रवक्ता ने कहा कि सैनी जून 2018 में सेवामुक्त हुए थे। साल 2021 में वह गैरकानूनी भूमि धोखाधड़ी के मामले में अपराधी पाए गए, इसलिए इन आदेश के मुताबिक वह बिना नोटिस गिरफ्तारी के सुरक्षित नहीं थे।

उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट ने 19 अगस्त के अपने आदेश में सैनी की हिरासत को 11 अक्तूबर 2018, 23 सितंबर 2020 के सुरक्षा आदेश और 12 अगस्त 2021 के अंतरिम जमानत के आदेश का उल्लंघन माना था।

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