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Panchkula News: 11वीं सदी की स्थापत्य कला के निशान समेटे है मां काली का दरबार

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कालका। मां काली माता मंदिर की पहचान केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की प्राचीन स्थापत्य विरासत भी इसे खास बनाती है। मंदिर भवन के नवनिर्माण के दौरान खुदाई में मिली शिव प्रतिमा और चक्रनुमा शिलाएं इस स्थान के ऐतिहासिक महत्व की ओर संकेत करती हैं। पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग के उपनिदेशक डॉ. नरेंद्र परमार ने निरीक्षण के बाद इन अवशेषों को 11वीं सदी की प्रतिहार शैली से संबंधित बताया था। मंदिर प्रशासन ने इन्हें सुरक्षित रखा है और नवनिर्माण के बाद प्रदर्शित करने की योजना है।
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प्राचीन वास्तुकला के प्रमाण
खुदाई में मिली शिव प्रतिमा को कीर्तिमुख और चक्रनुमा शिलाओं को आमलक बताया गया था। मंदिर स्थापत्य में आमलक शिखर के ऊपरी हिस्से में प्रयुक्त होने वाला प्रमुख वास्तु तत्व है। इन अवशेषों से यहां प्राचीन विशाल मंदिर होने की संभावना जताई गई थी। ऐसे में मंदिर की धार्मिक पहचान के साथ इसकी स्थापत्य विरासत भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
पौराणिक मान्यताओं से भी जुड़ा है मंदिर
मान्यता है कि मां काली के नाम पर ही कालका शहर का नाम पड़ा। मंदिर से जुड़ी कथा के अनुसार, सतयुग में मां ने महिषासुर सहित अनेक दैत्यों का संहार किया और बाद में इस भूमि पर आईं। एक अन्य मान्यता मंदिर को पांडवों से जोड़ती है। कहा जाता है कि वनवास के दौरान पांडवों ने यहां माता की पिंडी के दर्शन किए और मंदिर की स्थापना की।
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4.30 करोड़ से हो रहा नवनिर्माण
मंदिर भवन का करीब 4.30 करोड़ रुपये की लागत से नवनिर्माण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 4 अप्रैल 2025 को इसका शिलान्यास किया था। नवरात्र के दौरान निर्माण कार्य स्थगित रहेगा और इसे चैत्र नवरात्र से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। रविवार से शुरू हो रहे अश्विन नवरात्र में मंदिर को कलकत्ता और उत्तर प्रदेश से मंगवाए गए फूलों से सजाया जाएगा।
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