अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। पंजाब सरकार ने अपनी नई औद्योगिक नीति फाइनल कर ली है। अगले माह इस नीति को जारी कर दिया जाएगा। इसके साथ हर क्षेत्र के लिए अलग पॉलिसी तैयार की जा रही है जिससे क्षेत्र की समस्याओं व मुद्दों का पॉलिसी में समाधान किया जा सके। कैबिनेट मंत्री संजीव अरोड़ा ने मंगलवार को इस संबंध में जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि दिसंबर के आखिरी में वह नीति जारी करने की तैयारी कर रहे हैं। उद्योग विभाग के अधिकारियों को इस संबंध में आदेश जारी कर दिए गए हैं। प्रदेश में उद्योगों के अनुकूल माहौल बनाने के लिए ही यह नीति तैयार की गई है। पॉलिसी के लिए हर क्षेत्र के लिए कमेटियां गठित की गई थी ताकि पॉलिसी के लिए उनके सुझाव लिए जा सके। अगली कैबिनेट की बैठक में पॉलिसी लाने की सरकार तैयारी कर रही है। सरकार ने नीति तैयार करने के लिए आईटी, साइकिल उद्योग, आटो, इलेक्ट्रिक वाहन, नवीकरणीय ऊर्जा, स्टील और रोलिंग मिलों, प्लास्टिक और रासायनिक उत्पाद, लॉजिस्टिक्स और वेअरहाउसिंग, फिल्म मीडिया, फार्मास्यूटीकल और बायो टैक्नोलॉजी, युनिवर्सिटी और कोचिंग संस्थाओं, अस्पताल और सेहत संभाल, स्टार्टअप, परचून और इलेक्ट्रॉनिकस व्यवस्था डिजाइन और निर्माण सभी क्षेत्रों की कमेटियां गठित की थी। पंजाब से दूसरे राज्यों के लिए उद्योग पलायन न करें और साथ ही निवेश बढ़ाने के लिए ही पॉलिसी में सभी प्रावधान शामिल किए गए हैं।
उद्योग विभाग के अनुसार हर उद्योग की अपनी जरुरतें हैं। एक पॉलिसी सभी का समाधान नहीं कर सकती है। यही कारण है कि क्षेत्रीय कमेटियां गठित करके पॉलिसी तैयार करने का फैसला लिया जिससे सभी उद्योग के समस्याओं का इसमें समाधान किया जा सके। अगर किसी उद्योग को बिजली डयूटी से छूट दी जाती है तो इसका लाभ सिर्फ उस उद्योग को होता है जिसकी बिजली की खपत अधिक है। कम खपत वाले उद्योग को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। वर्ल्ड एमएसएमई फोरम के प्रधान बदिश जिंदल ने बताया कि साईकिल उद्योग की बड़े लंबे समय से एक साइकिल पार्क बनाने की मांग कर रहा है। कपड़ा उद्योग की भी कौशल विकास केंद्र स्थापित करने मांग है ताकि मैनपॉवर की कमी पूरी की जा सके। इस नई पॉलिसी से इन मांगों के पूरा होने की उम्मीद है।