चुनावी दंगल: मेयर की कुर्सी के लिए बिछी सियासी बिसात
पंचकूला की सत्ता के लिए शह और मात का खेल शुरू
माई सिटी रिपोर्टर
पंचकूला। शहर की सरकार के लिए बिगुल बज चुका है और इसके साथ ही पंचकूला की गलियों से लेकर चंडीगढ़ के सियासी गलियारों तक हलचल तेज हो गई है। 10 मई को जनता जनार्दन ईवीएम का बटन दबाकर शहर का मुकद्दर तय करेगी लेकिन उससे पहले असली दंगल पार्टियों के भीतर टिकट हासिल करने को लेकर चल रहा है। 13 मई को जब नतीजे आएंगे तब साफ होगा कि पंचकूला का ताज किसके सिर सजेगा।
अनुभव के साथ जाएं या नए जोश पर खेलें दांव?
सत्ताधारी भाजपा के खेमे में दावेदारों की फेहरिस्त सबसे लंबी है। पूर्व मेयर कुलभूषण गोयल एक बार फिर रेस में सबसे आगे नजर आ रहे हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि चुनाव लड़ने की कला और संगठन में मजबूत पकड़ उनके पक्ष में सबसे बड़ी दलील है। वहीं दूसरी ओर, अमित जिंदल ने अपनी सक्रियता से मुकाबले को त्रिकोणीय बना दिया है। कई सामाजिक संस्थाओं का साथ और नेताओं से नजदीकी उनके दावे को वजन दे रही है। इसके अलावा, शाम लाल बंसल, रंजीता मेहता, प्रदीप गोयल और अनिल थापर जैसे चेहरे भी दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक अपनी फील्डिंग सजाने में जुटे हैं।
बंसल कार्ड पर टिकी नजरें, दिग्गजों की भी दावेदारी
विपक्ष में सबसे ज्यादा चर्चा मनीष बंसल के नाम की है। पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल के बेटे मनीष पर न केवल स्थानीय कार्यकर्ताओं, बल्कि हाईकमान का भी भारी दबाव है। माना जा रहा है कि अगर वह मैदान में उतरते हैं, तो मुकाबला बेहद कड़ा हो जाएगा। हालांकि, सुधा भारद्वाज, उपिंद्र कौर आहलूवालिया और रविंद्र रावल जैसे मंझे हुए खिलाड़ी भी कतार में हैं, जो किसी भी वक्त पासा पलट सकते हैं।
तीसरे मोर्चे की धमक: आप, इनेलो और जजपा भी तैयार
आम आदमी पार्टी, झाड़ू के दम पर मैदान मारने को तैयार सुरेंद्र राठी, राजीव मनोचा और अनिल पंगोत्रा ने मोर्चा संभाल लिया है। वहीं इनेलो जिला शहरी प्रधान मनोज अग्रवाल के भरोसे अपनी खोई जमीन तलाशने की कोशिश में है। जबकि जजपा जिला अध्यक्ष ओपी सिहाग के नाम पर मुहर लगाने की अंतिम तैयारी में है।
पॉलिटिकल मीटर
पार्टियां इस बार केवल हवा-हवाई दावों पर नहीं, बल्कि ग्राउंड रिपोर्ट पर भरोसा कर रही हैं। टिकट उसी को मिलेगा जिसकी जनता में पैठ मजबूत होगी।