इस मामले में हाईकोर्ट के आदेश पर एसएचओ मंजीत कौर और एएसआई सरताज सिंह कोर्ट में पेश हुए और कहा कि यह पूरा मामला गलत पहचान का है। असल में याची का भाई इस मामले में आरोपी था और इस जानकारी के बाद डीडीआर दर्ज कर याची को बेकसूर बता दिया गया था। इस जानकारी के साथ ही दोनों ने हाईकोर्ट से बिना शर्त माफी भी मांगी। हाईकोर्ट ने कहा कि माफी केवल अपने किए गए कार्यों के परिणाम से बचने का प्रयास मात्र है।
अधिकारियों पर लटकी कार्रवाई की तलवार
हाईकोर्ट ने पठानकोट के एसएसपी को जांच का आदेश दिया है कि क्या यह मामला गलत पहचान का है। यदि हां तो जिला अदालत में जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान इस बारे में जानकारी पुलिस ने क्यों नहीं दी और इस सब के लिए दोषी कौन है। इस बारे में उन्हें पठानकोट के जिला जज को रिपोर्ट देनी होगी। पठानकोट के जिला जज यदि उपयुक्त समझें तो दोषी पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश जारी करें। ऐसे में अब जांच अधिकारी सहित एसएचओ और एएसआई पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है।
दोषियों से होगी राशि की वसूली
पुलिस की चूक के चलते याची को पहले जिला अदालत और फिर हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका दाखिल करनी पड़ी। इसके लिए हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार को मुआवजे के तौर पर याची को डेढ़ लाख रुपये देने का आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पहले यह राशि सरकारी देगी और बाद में इस मामले में दोषी पाए जाने वाले अफसर से यह राशि वसूली जा सकेगी।