चंडीगढ़। बंदूक लहराते हुए लड़की का पीछा करने के आरोपी को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने अग्रिम जमानत से इन्कार करते हुए कहा कि ऐसा कृत्य करने वाला रहम के लायक नहीं है। हाईकोर्ट ने कहा कि समाज को भय मुक्त रखना हमारी जिम्मेदारी है और ऐसा करते हुए आरोपी के अधिकारों की रक्षा के साथ-साथ समाज के हित के बीच संतुलन जरूरी है।
याचिका दाखिल करते हुए आरोपी ने आर्म्स एक्ट सहित आईपीसी की अन्य धाराओं में मोगा में दर्ज एफआईआर में अग्रिम जमानत की मांग की थी। हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि एक आदमी जो बंदूक लहराते हुए लड़की का पीछा करता है वह उस पीड़िता व उसके परिवार के लिए बेचैनी और आघात का कारण बन सकता है। ऐसे कृत्यों के लिए रोकथाम बेहद जरूरी है, यदि ऐसा नहीं किया गया तो नागरिक व्यवस्था और समाज का ताना-बाना बिगड़ सकता है।
उक्त घटना सीसीटीवी कैमरे में भी कैद बताई गई है। पीड़िता ने याचिकाकर्ता की मौजूदा कार्रवाई के कारण आसन्न दुर्घटना होने का डर भी व्यक्त किया है। ऐसे मामले में यदि आरोपी को जमानत दी गई तो जांच एजेंसी के स्वतंत्र और निष्पक्ष कार्य में बाधा आएगी। अग्रिम जमानत याचिका पर विचार करते समय, न्यायालय को व्यक्तिगत अधिकारों की सुरक्षा और सामाजिक हितों की रक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। हाईकोर्ट ने कहा कि यह जरूरी है कि समाज में प्रत्येक व्यक्ति किसी भी अपराध के पूर्वाभास और भय से मुक्त माहौल की उम्मीद कर सके।