पाकिस्तान से संबंध होने और आतंकवादी गतिविधियों को अंजाम देने की योजना बनाने के आरोपी को प्रथम दृष्टया मामला नहीं बनने पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि आरोप बेहद गंभीर हैं, केवल इस आधार पर किसी को जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता।
अमृतसर के गुरसेवक सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए नियमित जमानत देने की अपील की थी। याची ने बताया कि 2020 में उस पर गैर कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) और शस्त्र एक्ट की धारा और जेल अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की गई थी। उस पर आरोप है कि वह आतंकी गिरोह का हिस्सा था, जो देश में विभिन्न स्थानों पर आतंकवादी घटनाओं को अंजाम देने की योजना बना रहा था।
यह भी पढ़ें: Chandigarh: बस की टक्कर से गई थी कार सवार सेल्स मैनेजर की जान, अब परिजनों को मिलेगा सवा दो करोड़ का मुआवजा
सह-अभियुक्त के बयान के अनुसार याची और अन्य ने लुधियाना की आईआईएफएल गोल्ड लोन शाखा से 30 किलोग्राम सोना लूट लिया था। पाकिस्तान के साथ संबंधों के आधार पर कथित तौर पर कुछ आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने की योजना बनाने के आरोप में प्रथम दृष्टया कोई मामला नहीं बनता है क्योंकि साजिश रचना फिलहाल साबित नहीं हो रहा है।
हाईकोर्ट ने कहा कि गैर-कानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम में कड़े प्रावधान हैं, ऐसे में अदालत की जिम्मेदारी और अधिक बढ़ जाती है। ऐसे में केवल इसलिए कि आरोप गंभीर हैं, जमानत से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस मामले में अपीलकर्ता और सह-अभियुक्तों के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी चालान पेश होने की तारीख तक सक्षम प्राधिकारी द्वारा नहीं दी गई थी। बाद में मंजूरी मिलने के बाद चालान रिपोर्ट सहित अदालत में दाखिल किया दिखाया गया।
कोर्ट ने कहा कि राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं किया गया। याची 5 जुलाई, 2020 से हिरासत में है और अब तक 38 गवाहों में से केवल एक की गवाही हुई है। याची से कोई बरामदगी नहीं हुई है। इस मामले से पहले पुलिस स्टेशन मोहाली में याची पर मामला दर्ज किया गया था। याची करीब साढ़े तीन साल से हिरासत में है। मामले का निपटारा होने में समय लगेगा इस आधार पर हाईकोर्ट ने याची को जमानत दे दी।