हरियाणा के थानों में एसएचओ बने बैठे उपनिरीक्षकों और निचले रैंक के पुलिसकर्मियों की विदाई तय है। उन्हें अपने मूल पद के अनुसार ही कार्य करना होगा। वे एसएसओ पद पर ज्यादा दिन तक सेवाएं नहीं दे पाएंगे। इन्हें थानों में एसएचओ लगाने पर डीजीपी पीके अग्रवाल नाखुश हैं। जिलों में हुई तैनातियों की सूचना मिलने पर उन्होंने कड़ा संज्ञान लिया है।
अग्रवाल ने पुलिस आयुक्तों और सभी एसपी को निर्देश दिए हैं कि निरीक्षक रैंक के पुलिस कर्मी को ही एसएचओ लगाया जाए। जिलों में निरीक्षक रैंक के पुलिस कर्मी पर्याप्त संख्या में उपलब्ध हैं। ऐसे में निचले रैंक के कर्मियों को एसएचओ की जिम्मेदारी सौंपना स्वस्थ एवं अच्छी परंपरा नहीं है।
डीजीपी ने यह सुनिश्चित करने के लिए कहा है कि भविष्य में ऐसी कोई तैनाती नहीं होनी चाहिए। पेशेवर, योग्य निरीक्षकों की कमी और आपात स्थिति होने पर ही निरीक्षक के बजाय अन्य पुलिस कर्मियों को एसएचओ का जिम्मा सौंपे। निर्देशों का उल्लंघन करने पर नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।
उन्होंने सभी रेंज के आईजी, एडीजीपी रोहतक रेंज, डीआईजी रेलवे एवं कमांडो व एसपी रेलवे को भी निर्देश दिए हैं कि अपने-अपने क्षेत्र में उपनिरीक्षकों व निचले रैंक के पुलिस कर्मियों की एसएसओ पद पर तैनाती की समीक्षा कर कार्रवाई रिपोर्ट पुलिस मुख्यालय को भेजें।
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सूत्रों के अनुसार डीजीपी के पास जिलों से अनेक शिकायतें पहुंची हैं कि एसएचओ पद पर तैनाती को लेकर जिलों में भाई-भतीजावाद चल रहा है। चहेते व पहुंच रखने वाले उप निरीक्षक व अन्य पुलिसकर्मी थाना प्रभारी लगाए गए हैं, जिससे कार्य में असंतुलन पैदा हो रहा है। उनकी कार्यप्रणाली को लेकर गृह मंत्री अनिल विज व सरकार के पास भी शिकायतें पहुंची हैं।