चंडीगढ़। एसोसिएट जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को प्लाट आवंटन मामले में पंचकूला सीबीआई कोर्ट द्वारा चार्ज फ्रेम किए जाने को चुनौती देने वाली याचिका पर कपिल सिब्बल के पेश न होने के चलते सुनवाई नहीं हो सकी। अचानक फिजिकल सुनवाई आरंभ होने के चलते सिब्बल ने तारीख मांगी थी जिसका सीबीआई ने विरोध किया। सिब्बल की अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने सुनवाई 20 सितंबर तक टाल दी जिसके चलते चार्ज फ्रेम करने पर रोक जारी रहेगी।
1982 में तत्कालीन मुख्यमंत्री भजनलाल ने एजेएल को प्लॉट आवंटित किया था। 10 साल तक निर्माण न होने पर हरियाणा अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (हुडा) ने इसे वापस ले लिया। 2005 में भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने 1982 में तय की गई कीमत पर ही प्लॉट एजेएल को फिर से आवंटित कर दिया। सीबीआई ने भूपेंद्र सिंह हुड्डा और (एजेएल) के तत्कालीन अध्यक्ष मोती लाल वोहरा के खिलाफ आरोप पत्र दायर कर दिया था। सीबीआई ने दावा किया था कि एजेएल को दोबारा प्लाट आवंटन करने से बहुत ज्यादा राजस्व का नुकसान हुआ था। ईडी ने भी मामले की जांच की और पंचकूला में एजेएल को जमीन आवंटन में अनियमितताओं के चलते आरोपपत्र दायर किया था। सीबीआई कोर्ट ने 16 अप्रैल को भूपेंद्र सिंह हुड्डा के खिलाफ आरोप तय कर दिए थे। आरोप के अनुसार यह प्लॉट एजेएल को आवंटित किया गया था जिसे यंग इंडिया लिमिटेड के माध्यम से गांधी परिवार द्वारा संचालित किया जाता है। इसी को हुड्डा ने याचिका दाखिल करते हुए हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई कोर्ट में चल रही कार्रवाई पर रोक लगा दी थी। सोमवार को सुनवाई आरंभ हुई तो सिब्बल की ओर से निवेदन किया गया कि पहले सुनवाई वीडियो कांफ्रेंसिंग से होती थी और अचानक फिजिकल सुनवाई आरंभ हो गई है। ऐसे में उन्हें कुछ समय दिया जाए ताकि वह पेश हो सकें। सीबीआई ने इसका विरोध करते हुए कहा कि याची को अंतरिम राहत मिल चुकी है और रोक के चलते निचली अदालत में सुनवाई नहीं हो पा रही है ऐसे में रोक हटाई जाए। हाईकोर्ट ने कहा कि यदि रोक हटा दी गई तो याचिका आधारहीन हो जाएगी क्योंकि इसमें चार्ज फ्रेम करने को ही चुनौती दी गई है। हाईकोर्ट ने हुड्डा की राहत को जारी रखते हुए सुनवाई टाल दी।