चंडीगढ़। हरियाणा नगर निकाय चुनाव में प्रधान पद के लिए पिछड़ा वर्ग के आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका पर पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब कर लिया है।
याचिका दाखिल करते हुए रेवाड़ी निवासी राम कृष्ण मेहलावत ने हाईकोर्ट को बताया कि हरियाणा सरकार ने पिछड़ा वर्ग को नगर निकाय चुनाव में प्रधान पद के लिए आरक्षण देने का फैसला लिया है। इसके लिए हरियाणा म्यूनिसिपल एलेक्शन रूल में संशोधन कर नियम 70ए को जोड़ दिया है।
इसके तहत आबादी केअनुरूप नगर निकाय चुनाव में प्रधान पद के लिए बीसी वर्ग के लिए प्रधान पद को आरक्षित किया जाना है। याचिकाकर्ता ने कहा कि बिना सही आंकड़ों के इस प्रकार आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता। सरकार का यह फैसला स्पष्ट रूप से अवैध, भेदभावपूर्ण, मनमाना और असंवैधानिक है।
याची ने बताया कि भारत सरकार ने 2011 की जनगणना में अनुसूचित वर्ग व सामान्य वर्ग के आंकड़े एकत्रित किए थे। उस दौरान बीसी वर्ग को शामिल नहीं किया गया था। बीसी वर्ग को एससी या एसटी की तरह सीधा आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता है।
याची ने कहा कि इस प्रकार बिना आंकड़ों के सीटों को आरक्षित करना याचिकाकर्ता व उसी के अन्य लोगों के साथ अन्याय है जो इन पदों के लिए दावेदार हैं। हरियाणा सरकार बिना आंकडे़ एकत्रित किए इस प्रकार चुनाव नहीं करवा सकती है। याची ने सुप्रीम कोर्ट के विकास किशनराव बनाम महाराष्ट्र सरकार मामले में दिए गए फैसले का भी हवाला दिया जिसमें स्पष्ट है कि आंकड़ों के बिना आरक्षण का लाभ नहीं दिया जा सकता। याची पक्ष की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका पर हरियाणा सरकार और अन्य प्रतिवादियों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने का आदेश दिया है।