पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने बठिंडा में एक व्यक्ति से 2 करोड़ की धोखाधड़ी के मामले में पंजाब पुलिस को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए जांच सीबीआई को सौंप दी है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस मामले में पुलिस आरोपियों को बचाने में लगी है। इन टिप्पणियों के साथ ही हाईकोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज करते हुए उन पर 5-5 लाख का जुर्माना लगाया है, जिसे पीजीआई में गरीब मरीजों के इलाज के लिए बनाए गए फंड में जमा करवाना होगा।
गुरदास एग्रो प्राइवेट लिमिटेड के मालिक शरण दास की शिकायत पर अक्टूबर 2014 में धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी। आरोपी अर्जुन भनोट और राकेश भनोट मेसर्स अर्जुनमल रिटेल होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड ने बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से दास से कथित तौर पर 2 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की है। आरोप था कि बैंक ने बिना उचित दस्तावेजों के आरोपियों को 6.5 करोड़ रुपये का कर्ज मंजूर कर दिया था। जब यह बात सामने आई तो बैंक अधिकारियों ने शिकायतकर्ता से दो करोड़ रुपये उधार देने के लिए संपर्क किया।
जब उन्होंने इनकार कर दिया, तो उनके खाली हस्ताक्षरित चेक जो बैंक के पास थे, उनका इस्तेमाल कर 2 करोड़ रुपये इन दोनों आरोपियों के खाते में ट्रांसफर कर दिए। इसी मामले में दोनों आरोपियों ने हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत मांगी थी। हाईकोर्ट ने इस केस के सभी तथ्यों को देखने के बाद कहा कि दोनों आरोपियों को पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का पूरा साथ मिल रहा था, जिस कारण मामले की जांच प्रभावित हुई है। इस तरह की जांच से आम लोगों में पुलिस के प्रति विश्वास कम होता है। लिहाजा हाईकोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपते हुए दो माह में जांच पूरी करने का आदेश दिया है।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों पर उठे सवाल
हाईकोर्ट ने कहा कि डीजीपी दिनकर गुप्ता ने हाईकोर्ट में जो हलफनामा दिया था, उसमें यह तक नहीं बताया गया कि याचिकाकर्ताओं को प्रोक्लेम ऑफेंडर घोषित किया जा चुका है। यह इस ओर इशारा करता है कि आरोपियों को वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का समर्थन मिल रहा था। जिन्हें कानून के अनुरूप जांच करनी चाहिए उन्होंने आरोपियों के मांगपत्र में उनकी बेकसूरी को ढूंढना चुना।