चंडीगढ़। धान की सीधी बुवाई को बढ़ावा दे रही पंजाब सरकार के लिए इस साल निर्धारित किए गए लक्ष्यों पर, बुवाई शुरू होने से पहले ही पानी फिरता दिखाई दे रहा है। राज्य में गर्मी के इस मौसम में लगातार चल रही बेमौसम बारिश ने मूंग की बुवाई करने वालों के हौसले पस्त कर दिए, वहीं 10 जून से शुरू हो रही धान की बुवाई को भी झटका लगा है। लगातार बारिश के मद्देनजर किसान अब धान की पुराने तरीके से बुवाई करने की ही तैयारी में जुट गए हैं।कृषि विभाग का मानना है कि अगर अगले 20 दिन भी राज्य में लगातार धूप निकले तो धान की सीधी बुवाई का लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है लेकिन मौसम विभाग के अनुमान कुछ ओर ही स्थिति प्रस्तुत कर रहे हैं। विभाग ने चालू हफ्ते में भी राज्य के अनेक हिस्सों में तेज बारिश की भविष्यवाणी की है और जून के पूरे महीने में पश्चिमी विक्षोभ के कारण थोड़े-थोड़े अंतराल पर बारिश और आंधी का मौसम चलता रहेगा।
कृषि विभाग की तरफ से इस साल 50 फीसदी रकबे में धान की सीधी बुवाई का लक्ष्य रखा था लेकिन बारिश को देखते हुए अब विभाग यह आंकड़े जुटा रहा है कि कितने किसानों ने सीधी बुवाई शुरू की थी, क्योंकि बीते एक महीने से हर दूसरे-तीसरे दिन बारिश ने सीधी बुवाई वाले बीजों को खराब कर दिया है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की सीधी बुवाई उसी हालात में की जा सकती है, जब बुवाई के बाद कम से कम 20 दिन तक बारिश न हो। अगर इस अवधि के दौरान बारिश हो जाती है या खेत को पानी लगता है तो बोया हुआ धान का दाना या तो बाहर आ जाता है या फिर पानी से खेत में ही एक जगह इकट्ठा हो जाते हैं। बाद में, इसका सीधा असर पैदावार पर पड़ता है।
पंजाब सरकार ने इस साल धान की सीधी बुवाई के प्रति किसानों को प्रोत्साहित करने के लिए 450 करोड़ रुपये की राशि रखी है। सरकार ने इस उम्मीद के साथ कि सीधी बिजाई से भूजल की 15-20 फीसदी बचत हो सकेगी, धान की सीधी बिजाई का 30 लाख एकड़ (12 लाख हेक्टेयर) क्षेत्रफल का लक्ष्य भी तय किया है। कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा हिदायत जारी की जा चुकी है कि इस साल धान की रिवायती बुवाई के बजाय 12 लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में डायरेक्ट सीडिंग ऑफ राइस (डीएसआर) तकनीक अपनाई जाए लेकिन मौसम ने इसे लेकर कई तरह की आशंकाएं पैदा कर दी हैं।