चंडीगढ़। राष्ट्रमंडल खेलों से कुश्ती को बाहर करने से हरियाणा को बड़ा झटका लगा है। प्रदेश सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए इसके विरोध का फैसला लिया है। प्रदेश की ओर से जल्द ही कुश्ती पर एक प्रस्तुति तैयार करके केंद्र सरकार के समक्ष रखी जाएगी और दोबारा से इस खेल को राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल करने की मांग जोरदार तरीके से उठाई जाएगी। हरियाणा का तर्क है कि कुश्ती खेल हरियाणा के युवाओं की रग रग में है और हर बार राष्ट्रमंडल खेलों में हरियाणा के खिलाड़ी झंडे गाड़ते हैं।
गौर हो कि कुश्ती हरियाणा के प्रमुख खेलों में शामिल है। इस खेल में हरियाणा के खिलाड़ियों का शुरू से ही दबदबा रहा है। राष्ट्रमंडल खेलों से लेकर, एशियन और ओलंपिक तक में हरियाणा के पहलवान अपना लोहा मनवा चुके हैं। अगर कुश्ती को इन खेलों से बाहर किया गया तो यह हरियाणा के पहलवानों के लिए बड़ा नुकसान होगा। प्रदेश सरकार ने खिलाड़ियों के दर्द को समझते हुए इस फैसले को लेकर अपना पक्ष रखने का मन बनाया है।
2018 राष्ट्रमंडल में 9 पहलवानों ने दिलाए थे मेडल
अप्रैल 2018 में ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट में संपन्न हुए राष्ट्रमंडल खेलों में हरियाणा के खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया था। इन खेलों में भारत ने कुल 66 पदक जीते हैं। इनमें एक तिहाई यानी 22 पदक अकेले हरियाणा के खिलाड़ियों ने जीते। हरियाणा के खिलाड़ियों ने देश को नौ स्वर्ण पदक, सात रजत और छह कांस्य पदक दिलाए थे। प्रदेश से कुल 38 खिलाड़ियों में इनमें हिस्सा लिया था, जबकि अकेले कुश्ती में महिला और पुरुष पहलवानों ने 9 मेडल (3 स्वर्ण, 3 रजत, 3 कांस्य) जीते थे।
इन खिलाड़ियों ने जीते मेडल
स्वर्ण पदक विजेता पहलवानों में विनेश फौगाट, सुमित मलिक और बजरंग पूनिया शामिल थे। रजत पदक विजेताओं में पूजा ढांडा, मौसम खत्री, पहलवान बबीता फौगाट और कांस्य पदक वालों में सोमवीर कादयान, साक्षी मलिक व किरन बिश्नोई के नाम शामिल हैं। इतना ही नहीं हरियाणा की कुश्ती को लेकर बॉलीवुड में दंगल और सुल्तान फिल्म भी बनाई जा चुकी है।
कुश्ती हरियाणा का प्रमुख खेल है और इसी खेल में हरियाणा के खिलाड़ी अधिक संख्या में मेडल जीतते हैं। विभाग की ओर से एक प्रस्तुती केंद्र सरकार के पास भेजी जाएगी और मजबूती से अपना पक्ष रखा जाएगा, ताकि दोबारा से इस खेल को राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल किया जा सके। - पंकज नैन, खेल निदेशक, हरियाणा