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हाईकोर्ट के आदेश से दहशत में कैंबवाला के लोग, प्रशासक बदनौर को बताई समस्या

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चंडीगढ़। सुखना कैचमेंट पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश से प्रभावित होने वाले गांव वासियों की समस्याओं को सुनने के लिए प्रशासन ने एक कमेटी का गठन किया है। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर के निर्देशों पर गठित इस कमेटी की अध्यक्षता डीसी मनदीप सिंह बराड़ करेंगे। वे इन गांवों में जाकर लोगों की समस्याओं को सुनेंगे और प्रशासन को अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे। वहीं, कैचमेंट एरिया में आने वाले मकानों के सर्वे का काम भी कोरोना वायरस की वजह से कुछ दिन के लिए टाल दिया गया है।
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इससे पहले भाजपा का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद के नेतृत्व में प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और एडवाइजर मनोज परिदा से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने कैंबवाला, खुड्डा अलीशेर और किशनगढ़ की विभिन्न समस्याओं को लेकर बातचीत की। प्रतिनिधिमंडल में भाजपा महासचिव रामवीर भट्टी, चंद्रशेखर, भजन सिंह, हुकम चंद, पाल राम, दलीप कुमार, हरमेश, श्रीराम और गुरनाम सिंह शामिल थे। अरुण सूद ने कहा कि पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट की ओर से सुखना कैचमेंट एरिया के बारे में दिए गए निर्णय के बाद गांववासियों में भय की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि इस संबंध में एक कमेटी का गठन किया जाना चाहिए। प्रशासक बदनौर ने आश्वासन दिया कि इस संबंध में एक कमेटी गठित की जाएगी, जो इन तीनों गांवों के निवासियों की सुनवाई करेगी और अपनी एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपेगी। इस रिपोर्ट पर विस्तृत चर्चा के बाद ही कोई निर्णय लिया जाएगा। प्रशासक बदनौर ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश का सम्मान करते हुए सुखना कैचमेंट एरिया को तो बचाया ही जाएगा क्योंकि सुखना झील इस शहर की महत्वपूर्ण विरासत है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि गांववासियों के मकानों को बेवजह तोड़ा न जाए। प्रशासन ने डीसी मनदीप सिंह बराड़ की अध्यक्षता में शाम तक एक कमेटी का गठन भी कर दिया।
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लाल डोरे के बाहर रह रहे लोगों के लिए भी राहत की मांग
भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि गांवों में लाल डोरे से बाहर रहने वाले निवासियों पर हर वक्त मकान टूटने की तलवार लटकी रहती है, जबकि गांवों की एक बहुत बड़ी जनसंख्या लाल डोरे के बाहर रहती है। वर्षों से लाल डोरे को न बढ़ाए जाने के कारण ये लोग समस्या से जूझ रहे हैं। प्रशासक ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि प्रशासन पहले से ही इस विषय में विचार कर रहा है कि इन लोगों के निर्माण को किसी प्रकार नियमित कर इन्हें राहत प्रदान की जा सके। इस संबंध में नीति निर्धारण का कार्य विचाराधीन है।
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