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जलियांवाला बाग: लोगों को रास नहीं आ रहा बाग का नया स्वरूप, बोले-20 करोड़ रुपये खर्च कर मौलिकता को ही खत्म किया

Tue, 31 Aug 2021 09:35 PM IST
पंचकुला ब्‍यूरो रवींद्र शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, अमृतसर (पंजाब)

सार

जलियांवाला बाग के नए अवतार पर विवाद छिड़ गया है। राहुल गांधी ने इसे जहां शहीदों का अपमान बताया तो वहीं कैप्टन अमरिंदर सिंह ने केंद्र सरकार का बचाव किया और कहा कि बाग में बढ़िया काम हुआ है। अब इस पर आम लोग और इतिहासकार भी अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं। 
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जलियांवाला बाग - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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विस्तार
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केंद्र सरकार ने जलियांवाला बाग स्मारक पर 20 करोड़ रुपये खर्च करके नया स्वरूप दिया लेकिन लोग इसको ठगी हुई नजर से देख रहे हैं। वजह है कि उनको इस नए स्वरूप में 13 अप्रैल 1919 के शहीदों से जुड़ी ऐतिहासिक वस्तुएं नजर नहीं आ रही हैं। करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए इस स्मारक में शहीदों की विरासत से की गई छेड़छाड़ की आधुनिक तस्वीर ही नजर आ रही है।

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102 वर्ष पुराने अंग्रेजों के क्रूर इतिहास को देख चुके लोग नए स्वरूप से ठगा सा महसूस करने लगे हैं। दूसरी तरफ लोग यह भी कह रहे हैं कि जलियांवाला बाग हत्याकांड की शताब्दी पर केंद्र सरकार ने 100 करोड़ रुपये खर्च कर नवीकरण की बात कही थी। अब 20 करोड़ रुपये खर्च करके जहां जलियांवाला बाग की मौलिकता को ही खत्म कर दिया है, वहीं केंद्र सरकार ने 80 करोड़ रुपये का जिक्र भी नहीं किया।

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                                             जलियांवाला बाग का पुराना दृश्य

तंग खूनी गली दिखाती थी अंग्रेजों की क्रूरता
शहर के उद्योगपति संजय मेहरा ने कहा कि जलियांवाला बाग की तंग खूनी गली में प्रवेश करते ही अंग्रेजों द्वारा यहां का प्रवेश द्वार बंद करने की बात याद आती थी। अब सैलानियों को एक आधुनिक गैलरी नजर आएगी। उन्होंने कहा कि सरकार को रेनोवेशन करते वक्त इसकी मौलिकता बनाए रखना चाहिए था।

बाग के हालात ही बता देते थे अंग्रेजों की क्रूरता
पहले जब सैलानी जलियांवाला बाग में प्रवेश करते थे तो उनको 13 अप्रैल 1919 को अंग्रेजों द्वारा बेकसूर भारतीयों पर चलाई गई गोलियों की तस्वीरें एकदम सामने आ जाती थीं। सैलानियों को इसके बारे में जानकारी देने के लिए अलग-अलग गैलरियां बनाई गई हैं। इसमें से एक में डाक्यूमेंट्री के माध्यम से यह जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही अन्य गैलरियों में म्यूजियम के माध्यम से यह दिखाया जाएगा।
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तंग गली से निकलते ही जगती थी देशभक्ति की भावना
इतिहासकार सुरिंदर कोछड़ का कहना है कि पहले जलियांवाला बाग तंग गली से निकलते समय और कुएं के पास पहुंचते ही लोगों में देशभक्ति की भावना जागृत हो जाती थी। अब उनको लगता है जैसे वह किसी होटल या किसी आधुनिक रेस्टोरेंट से गुजर रहें हों। इससे लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंची है। सेंट्रल मोनोमेंट (स्मारक) पर लाइट एंड साउंड शो दिखाया जाना लोगों को पसंद नहीं आ रहा है। 20 करोड़ रुपये की लागत से की जाने वाली रेनोवेशन के बाद दिखने वाले स्वरूप को लेकर लोगों को बहुत उम्मीदें थीं।

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