कालका। विश्व धरोहर में शामिल कालका-शिमला मार्ग पर जनवरी के अंत तक रेलवे आरसीएफ पारदर्शी कोच उतार सकता है। कोच तैयार होने के बाद आरडीएसओ द्वारा इसका ट्रायल लिया जाएगा। ट्रायल सफल होने के बाद कोच की रेगुलर प्रोडक्शन शुरू हो जाएगी। बता दें कि कपूरथला आरसीएफ पारदर्शी कोचों के निर्माण में जुटा है। आरसीएफ कालका-शिमला रेल मार्ग पर पांच टॉय ट्रेनों के लिए 30 विस्टाडोम कोच बना रहा है। इसकी बड़ी और चौड़ी खिड़कियों को जरूरत के अनुसार खोला भी जा सकेगा।
इनके माध्यम से बाहरी परिदृश्य की साफ झलक देखने को मिलेगी। इन कोचों की छत भी शीशे से बनी होंगी। मंत्रमुग्ध करने वाले पहाड़ी दृश्यों का कोच में बैठे ही आनंद भी उठाया जा सकेगा। रेलवे मंत्रालय के आदेश पर आरसीएफ डिजाइन तैयार करने में जुटा है। डिब्बों के मुख्य आकर्षण बड़ी ओर चौड़ी खिड़कियों के अतिरिक्त यात्री अपनी आरामदायक सीटों को ट्रेन की दिशा के अनुसार 180 डिग्री के एंगल तक घुमा भी सकेंगे। कोच का अंदरूनी हिस्सा खूबसूरत एफआरपी पैनल से तैयार किया जाएगा। ये कोच सीसीटीवी और फायर अलार्म आदि जैसे आधुनिक सुरक्षा सुविधाओं से भी लैस होंगे। भारतीय रेलवे की तरफ से आरसीएफ को उत्तर भारत के प्रमुख पर्यटक यात्रा मार्ग कालका शिमला रेल के लिए अत्याधुनिक यात्री सुविधाओं वाले कोचों का निर्माण करने के लिए कहा गया है।
आरसीएफ ने शुरूआती डिजाइन तैयार किए
रेल कोच फैक्ट्री कालका-शिमला रेलवे के लिए 30 नैरो गेज विस्टाडोम डिब्बों का निर्माण करेगी। आरसीएफ ने एलएचबी तकनीक पर आधारित नए कोचों के लिए शुरुआती डिजाइन तैयार किए हैं। इन डिब्बों के लिए स्टेनलेस स्टील के हल्के वजन वाले शेल डिजाइन के अलावा बड़ी खिड़कियों और छत पर शीशे के विस्टाडोम तैयार किए गए हैं। नए शेल के अलावा, बोगियों को अपग्रेड करने और ब्रेक सिस्टम में सुधार की योजना बनाई गई है जिससे गाड़ी की मौजूदा 25/35 किमी प्रति घंटे से 40/55 किमी प्रति घंटे की गति क्षमता में उल्लेखनीय सुधार लाने में मदद मिल सकेगी। रेलवे अधिकारी ने बताया कि जनवरी के अंत तक कोच तैयार कर लिए जाएंगे।