इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 : रेवेन्यू में नंबर-वन, विकास में थर्ड
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पंचकूला को सबसे ज्यादा रेवेन्यू देने वाला इंडस्ट्रियल एरिया फेज-2 जिला प्रशासन और नगर निगम की अनदेखी का शिकार है। नगर निगम ने यहां की सड़कें तो बनाई हैं, लेकिन फुटपाथ जस के तस हैं। इतना ही नहीं, इंडस्ट्रियल एरिया में लटकते बिजली के तार हादसे को न्यौता दे रहे हैं। यहां नीचे लगे ट्रांसफार्मर ने कारोबारियों की चिंता बढ़ा रखी है। ऐसा नहीं है कि उद्यमियों ने इस संबंध में शिकायत नहीं की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई।
वार्ड नंबर 12 में पड़ने वाले फेज दो में असुविधाओं का अंबार है। सड़कें टूटी हुई हैं। परशुराम चौक को जोड़ने वाली आंतरिक रोड पर अभी भी करीब सौ से ज्यादा गड्ढे हैं। इन सड़कों से ही ट्रक आदि गुजरते हैं जो कि उद्यमियों का सामान लेकर आते हैं। इसके साथ ही फुटपाथ भी खराब हैं। बारिश के मौसम में पानी निकासी की व्यवस्था न होने के कारण पानी जमा हो जाता है, जिससे गड्ढे दिखाई नहीं देते हैं। इससे भारी वाहनों के पलटने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा स्ट्रीट लाइटें खराब होने के कारण भी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
कबाड़ियों ने फलाई हुई है गंदगी
फेज दो के एक प्लाट के सामने खाली जगह पर कबाड़ियों का जमावड़ा लगा रहता है। यह कबाड़ी सुबह से ही अपना डेरा डाल लेते है। इसके बाद पूरा दिन यह शहर से कचरा बीनकर यहां पर ही जमा करते है। इससे यहां चारों तरफ गंदगी का आलम बना हुआ है। बदबू के कारण उद्यमियों का और कर्मचारियों का फैक्ट्री में बैठना भी मुश्किल हो गया है।
कोट्स
बारिश के समय जलभराव की स्थिति बनती है। पानी निकासी का उचित प्रबंध न होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। टूटी सड़कों के कारण कई हादसे भी हो चुके हैं।
संजीव आहलुवालिया, उद्यमी
फेज दो में हुडा की काफी जमीन खाली पड़ी है। जहां झाड़ियां हैं, जिससे कई बार जानवर फैक्टरी में घुस जाते हैं। हुडा को खाली जगहों पर उगी झाड़ियों की कटाई करवानी चाहिए।
रमेश अग्रवाल, उद्यमी
टेलीकॉम कंपनियां तार डालने के लिए सड़क पर गड्ढे खोद जाती हैं। जिसमें बरसात के दिनों में पानी भर जाता है। इतना ही नहीं पानी जमा होने से सड़क टूटने का भी खतरा बना रहता है। प्रशासन को इस ओर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
अशोक गर्ग, उद्यमी
यहां फैली गंदगी के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कबाड़ियों की शिकायत प्रशासन को कर चुके हैं, लेकिन कुछ दिन बाद यह फिर से अवैध कब्जा कर लेते हैं।
राकेश गर्ग, उद्यमी