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अफसरों का गोलमाल: महज 84.55 करोड़ में बेच डाली 250 करोड़ की 122 एकड़ जमीन, पंचकूला का मामला

Fri, 13 Oct 2023 10:06 AM IST
निवेदिता वर्मा दीपक शाही, अमर उजाला, पंचकूला

सार

पटियाला के राजा भूपिंदर सिंह ने सरकार की मदद से भूपिंद्रा सीमेंट वर्क्स के लिए 1938 से 1955 तक 122 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। कुछ समय बाद भूपिंद्रा सीमेंट वर्क्स का नाम बदलकर पटियाला सीमेंट फैक्टरी रखा गया था। 1955 में अदालत के आदेश पर पटियाला सीमेंट फैक्टरी का नाम एसीसी सीमेंट फैक्टरी रख दिया गया था।
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सांकेतिक तस्वीर
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विस्तार
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पंचकूला के प्रशासनिक अधिकारियों ने एसीसी (एसोसिएटेड सीमेंट कंपनी) की करीब 250 करोड़ रुपये की 122 एकड़ औद्यागिक जमीन को कृषि भूमि बताकर 84.55 करोड़ रुपये में बिल्डर को बेच दिया। नवंबर 2021 में जमीन की रजिस्ट्री होने के बाद मामले ने तूल पकड़ा तो कालका के तत्कालीन तहसीलदार और वर्तमान में भिवानी में कार्यरत विक्रम सिंगला ने रजिस्ट्री को इंपाउंड कर एसडीएम के पास भेज दिया। दो महीने बाद ही जनवरी 2022 में कालका के तत्कालीन एसडीएम ने जमीन खरीदने वाली कंपनी डिवोक रिएल्टर्स 1.55 करोड़ का जुर्माना लगाकर रजिस्ट्री जारी कर दी।

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रजिस्ट्री इंपाउंड करने के बाद उसकी सुनवाई में छह माह से तीन साल तक का समय लगता है। सुनवाई डिविजनल कमिश्नर से लेकर एफसीआर (फाइनेंस कमिश्नर रेवेन्यू) के पास तक होती है, लेकिन तत्कालीन एसडीएम ने दो महीने में तहसीलदार की रिपोर्ट पर 1.55 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाकर रजिस्ट्री जारी कर दी। जैसे ही इसकी सूचना उद्योग एवं वाणिज्य विभाग को मिली, आला अधिकारियों ने जिला प्रशासन को पत्र लिखकर एसीसी की जगह को सरकारी संपत्ति बताते हुए रजिस्ट्री रद्द कर जमीन सरकार के नाम करने को कहा। लेकिन, इस मामले में आज तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।

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जमीन का सही मूल्य नहीं लगाने का आरोप
राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के निदेशक ने नवंबर 2021 में हुई 122 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री पर सवाल उठाते हुए प्रशासन को पत्र लिखा है। उन्होंने कालका एसडीएम व तहसीलदार की लापरवाही बताते हुए जमीन की वास्तविक मूल्य नहीं लगाने का आरोप लगाया। पत्र में रजिस्ट्री के खिलाफ अंबाला डिविजनल कमिश्नर के समक्ष अपील करने को कहा, ताकि उस जगह की सही कीमत निर्धारित की जा सके। हालांकि कालका के तहसीलदार ने 17 महीने बाद 122 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री के खिलाफ अंबाला डिविजनल कमिश्नर के समक्ष अपील की, लेकिन वहां से भी मामला खारिज कर दिया गया।

पीएम को भी दी शिकायत
एसीसी सीमेंट की 250 करोड़ रुपये की 122 एकड़ जमीन कम दरों पर बेची गई। इसकी शिकायत मुख्यमंत्री के साथ प्रधानमंत्री को दी गई है। मामला संज्ञान में आने के बाद भी विभाग कार्रवाई नहीं कर रहा। - रतन भूषण गर्ग, प्रधान एसीसी सीमेंट यूनियन।

अंबाला डिविजनल कमिश्नर के पास रजिस्ट्री रद्द करने की अपील की गई थी, जिसे डिविजनल कमिश्नर की कोर्ट में खारिज कर दिया। - विवेक गोयल तहसीलदार, कालका।
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तत्कालीन तहसीलदार ने रजिस्ट्री को गलत बताया
मार्च 2023 में तत्कालीन तहसीलदार वीरेंद्र गिल ने डिवोक रिएलटर्स के नाम की गई 122 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री के खिलाफ डिविजनल कमिशनर के पास अपील दायर की। इसमें बताया गया कि करीब 250 करोड़ रुपये से ज्यादा कीमत की जमीन की 84.55 करोड़ रुपये में रजिस्ट्री की गई। इसके चलते सरकार को भारी नुकसान हुआ है। औद्योगिक जमीन को कृषि भूमि बता कर बेच दिया गया, जो कि गलत है। अपील दायर करने के कुछ दिन बाद ही वीरेंद्र गिल का पानीपत तबादला हो गया।

सीएलयू न होने पर ओडेसी डेवलपर्स ने बेची जमीन
पटियाला के राजा भूपिंदर सिंह ने सरकार की मदद से भूपिंद्रा सीमेंट वर्क्स के लिए 1938 से 1955 तक 122 एकड़ जमीन अधिग्रहित की थी। इसमें सूरजपुर और रज्जीपुर का क्षेत्र शामिल था। कुछ समय बाद भूपिंद्रा सीमेंट वर्क्स का नाम बदलकर पटियाला सीमेंट फैक्टरी रखा गया था। 1955 में अदालत के आदेश पर पटियाला सीमेंट फैक्टरी का नाम एसीसी सीमेंट फैक्टरी रख दिया गया, जो कि अगस्त 1997 तक चला। अगस्त 1997 के बाद सरकार ने पर्यावरण विभाग से एनओसी न मिलने पर फैक्टरी को बंद कर दिया। करीब 10 साल तक फैक्टरी बंद रही।

1998 में मुंबई की कंस्ट्रक्शन कंपनी ओडेसी डेवलपर्स ने 192 करोड़ में एसीसी को खरीद लिया। तब सरकार ने ओडेसी डेवलपर्स पर चार शर्तें लगाई थीं। इसमें यह भी शामिल था कि सरकार की अनुमति के बिना जमीन का सीएलयू नहीं होगा। ओडेसी डेवलपर्स ने साल 2000 के बाद जमीन की सीएलयू करवाने की कोशिश की, लेकिन एसीसी सीमेंट एसोसिएशन हाईकोर्ट चली गई और सीएलयू नहीं हुआ। नवंबर 2021 में ओडेसी डेवलपर्स ने 122 एकड़ जमीन कृषि भूमि दिखाकर डिवोक रिएलटर्स को बिना किसी एनओसी के 84.55 करोड़ रुपये में बेची दी।
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