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धरना स्थल पर नहीं पानी और सफाई की व्यवस्था, धरने पर कर्मचारी किसे सुनाएं अपनी व्यथा

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पंचकूला। शहर के सेक्टर-पांच को धरना स्थल निर्धारित किया गया है। विभिन्न विभागों के कर्मचारी प्रदेशभर से यहां पर पहुंचकर अपनी मांगों के लिए यहां सरकार और विभागों के खिलाफ धरना देते हैं। इसके लिए वहां पर कर्मचारियों ने अपने तंबू लगा रखे हैं। मगर वहां पर न तो सफाई व्यवस्था है और न ही पानी की। ऐसे में वह अपनी इस व्यथा को किस सुनाएं। यहां धरनारत कर्मचारियों को इस भीषण गर्मी में भी पीने का पानी नहीं मिल रहा है। पानी लाने के लिए उन्हें दूर-दराज तक भटकना पड़ रहा है। गर्मी के मौसम में दूर से पानी लेकर आना भी कठिनाई भरा काम है।
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बता दें कि फिलहाल सेक्टर-पांच में 2018 की रोडवेज कर्मचारियों की हड़ताल के दौरान लगाए गए चालकों, एक्सटेंशन लेक्चरर और पीटीआई का धरना चल रहा है। यहां हर रोज 10 से 15 कर्मचारी धरने पर रहते हैं। यह संख्या कम ज्यादा होती रहती है, मगर यहां पानी की व्यवस्था नहीं है। न पीने के लिए और न ही अन्य जरूरी कामों के लिए।
पानी लेकर आने में छूटते हैं पसीने, नहीं होती सफाई
धरनारत कर्मचारी दीपांशु ने बताया कि पीने का पानी लाने में पसीने छूट जाते हैं। उन्होंने बताया कि गर्मी का मौसम होने के कारण एक कैंपर पानी कुछ ही घंटे चल पाता है। ऐसे में दिन में दो से तीन बार पानी के कैंपर लेकर आने पड़ते हैं। कई बार ठंडा पानी मिलता है तो कई बार गर्म मिलता है। बहुत परेशानी झेल रहे हैं। वहीं, कर्मचारी चेतन कुमार ने बताया कि धरना स्थल पर चारों ओर गंदगी बिखरी हुई है। लावारिस पशु घूमते रहते हैं। यहां कभी भी कोई सफाईकर्मी नहीं आता है। इसलिए गंदगी का आलम बना हुआ है। गंदगी के कारण कर्मचारियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
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कपड़े धोने के लिए भी जाना पड़ता है दूर
यहां धरने पर बैठे कर्मचारी विपिन कुमार ने बताया कि गर्मी का मौसम होने के कारण कपड़े बहुत जल्दी गंदे हो जाते हैं, मगर पानी नहीं होने के कारण रोज धो नहीं पाते हैं। कपड़े धोने के लिए दो-तीन किलोमीटर जाना पड़ता है। यहां सब हालात के मारे हुए लोग हैं। गर्मी के मौसम में पानी की व्यवस्था को प्रशासन को करनी ही चाहिए।
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