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पिछले साल एमएसपी से अधिक मिला भाव, इस बार बढ़ गया सरसों का रकबा

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चंडीगढ़। पिछले साल हरियाणा में सरसों के दाम एमएसपी से अधिक मिलने और तेल का रेट 200 रुपये प्रति लीटर पार करने के कारण इस बार प्रदेश में सरसों बिजाई का रकबा बढ़ गया है। अमूमन हर साल हरियाणा में 5 लाख हेक्टेयर में सरसों की बिजाई होती है, लेकिन अबकी बार यह आंकड़ा 6.50 लाख हेक्टेयर के पार कर चुका है। प्रदेश के कुछ इलाकों में पछेती किस्मों की बिजाई जारी है। अनुमान है कि इस बार 7 लाख हेक्टेयर में सरसों का रकबा हो सकता है।
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कृषि विभाग के अनुसार कई जिलों में तो सरसों बिजाई से अधिक की गई है। इनमें रेवाड़ी, महेंद्रगढ़, झज्जर, दादरी, भिवानी, जींद, रोहतक, फतेहाबाद, सिरसा, मेवात शामिल हैं। यह इलाका पूरी तरह से सरसों का माना जाता है। इसके अलावा, इस बार कैथल, करनाल, पानीपत समेत जीटी बैल्ट के जिलों में भी सरसों की बिजाई अधिक की गई है।
अनुमान है कि इस बार सरसों का रबा बढ़ा है। अभी गेहूं और सरसों की पछेती बिजाई चल रही है। दिसंबर के अंत तक इसका पूरा डाटा तैयार कर लिया जाएगा। लेकिन ये सही है कि इस बार किसानों का रुझान सरसों की तरफ बढ़ा है। - डॉ. जगराज ढांडी, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग।
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इसलिए बढ़ा किसानों का रुझान
पिछले साल सरसों का सरकारी रेट 4650 रुपये प्रति क्विंटल था, जबकि मंडी से बाहर की किसानों की फसल को 6500 से लेकर 7 हजार प्रति क्विंटल तक रेट मिला था। इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि खुद हैफेड एक दाना सरसों नहीं खरीद कर पाई थी। इसी कारण इस बार किसानों का रुझान सरसों की तरफ अधिक है और किसानों को उम्मीद है कि उन्हें इस बार भी भाव अच्छे मिलेंगे। गौरतलब है कि हरियाणा सरकार के हैफेड का कच्ची घानी सरसों का तेल पूरे देश में चर्चित है। कई प्रदेशों में इसकी आपूर्ति की जाती है।
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