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एम-3 ईवीएम न होने पर बिना वीवीपैट के हुए निकाय चुनाव

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चंडीगढ़। हरियाणा के 46 शहरी निकायों (18 नगर परिषद व 28 नगरपालिकाओं) के आम चुनाव एम-3 ईवीएम न होने के कारण बिना वीपीपैट के ही कराए गए। राज्य चुनाव आयोग ने जून 2020 में ही निकाय चुनाव के लिए केंद्रीय चुनाव आयोग से नई तकनीक वाली 45 हजार एम-3 ईवीएम मांगी थीं। राज्य आयोग को उसी समय केंद्रीय चुनाव आयोग ने नई मशीन देने से मना कर दिया था।
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आयोग ने साफ किया था कि एम-2 मॉडल ईवीएम ही राज्यों को दी जा सकती हैं, नीति अनुसार एम-3 ईवीएम नहीं देते। आरटीआई कार्यकर्ता हेमंत कुमार को राज्य निर्वाचन आयोग ने हाल में यह जानकारी मुहैया करवाई है। उन्होंने एम-3 ईवीएम से निकाय चुनाव न कराने को लेकर जानकारी मांगी थी।
राज्य आयोग ने हेमंत को बताया है कि वर्ष 2008 से प्रदेश के स्थानीय निकाय चुनावों में ईवीएम का प्रयोग किया जा रहा है। वर्ष 2007 से 2010 तक बीईएल बेंगलुरु से 5314 एम-2 मॉडल वाली सिंगल पोस्ट ईवीएम खरीदी थीं। वर्ष 2014 से 2016 तक 1560 सीयू (कंट्रोल यूनिट) और 3120 बीयू (बैलेटिंग यूनिट ) मल्टी पोस्ट ईवीएम खरीदी गईं। चुनावों के समय जरूरत अनुसार राज्य आयोग ईवीएम केंद्रीय चुनाव आयोग से लोन आधार पर लेता आ रहा है।
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तकनीकी मूल्यांकन समिति ने तय नहीं किया डिजाइन
हरियाणा निर्वाचन आयोग भविष्य में वीवीपैट युक्त एम-3 मॉडल ईवीएम खरीद सकता है। अभी तक आयोग की तकनीकी मूल्यांकन समिति ने नई मशीनों का डिजाइन तय नहीं किया है। जब तक समिति इसे फाइनल नहीं कर लेती, आवश्यक मात्रा में नई मशीनें नहीं खरीदी जा सकती हैं। आने वाले दिनों में होने वाले नगर निगम, नगर परिषद व नगरपालिका चुनाव भी बिना वीवीपैट के ही होने की संभावना है। हेमंत का कहना है कि राज्य निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 243 (के) और (जेडए) में पंचायत और नगर निकाय चुनावों के अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण संबंधी पर्याप्त शक्तियां होने पर एम-3 मशीनें अपने स्तर पर खरीदने के लिए सक्षम है।
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