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मां के संघर्ष ने बदल दी बेटियों की तकदीर, अब सफलता की लिख रहीं नई इबारत

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पंचकूला। आज की बेटियां पुराने रीति रिवाजों और मिथकों को तोड़कर न सिर्फ आगे बढ़ रही हैं बल्कि अपने दम पर सफलता के फलक को छूकर अपना तकदीर खुद लिख रही हैं। इसका बेहतर उदाहरण हैं खेलो इंडिया यूथ गेम्स में कलरीपायट्टू खेल में हिस्सा लेने पहुंची केरल के कन्नूर और तमिलनाडु की खिलाड़ी। इन बेटियों के राह में बड़ी मुश्किलें आईं, लेकिन जिद, जज्बा और जुनून के चलते अपने कदम आगे बढ़ाती गईं और हर क्षेत्र में जीत का परचम लहर रहीं हैं। यहां तक पहुंचने में इनकी मां ने अहम रोल निभाया और अब बेटियां भी अपनी मां के सपनों को पूरा करने में जुटी हैं। 10 से शुरू हुए कलरीपायट्टू खेल के मुकाबले 13 जून तक चलेंगे।
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बेटी का कॅरिअर संवारने के लिए मां ने दस साल तक पेट्रोल पंप किया काम
बेटी अश्वनी ए ने दो-दो बार स्वर्ण पदक हासिल किया और स्कॉलरशिप में मिले पैसे से घर के लेंटर को पूरा करवाया एक मां ने अपनी बेटी का भविष्य संवारने के लिए दस सालों तक पेट्रोल पंप पर तेल बेचा। अधूरे घर में लेंटर नहीं डलवाया सकी। छप्पर के घर में धूप और बारिश झेलती रही ताकि उसकी बेटी खेल में देश और राज्य के लिए पदक ला सके। बेटी ने पहले अपनी मां के सपने को पूरा करने के लिए राज्य और नेशनल में लगातार दो-दो बार स्वर्ण पदक हासिल किया और स्कॉलरशिप में मिले पैसे से अपनी मां के रहने के लिए अधूरे घर का लेंटर डलवाया ताकि उसकी काम से थक हारकर मां पूरी रात चैन की नींद सो सके। उसे बारिश और तूफान की रात के समय चिंता न सताए। ये कहानी है केरल के कन्नूर जिले की रहने अश्वनी ए और उसकी मां आशा की। अश्वनी ए खेलो इंडिया यूथ गेम्स में पंचकूला कलरीपायट्टू के हाईकी इवेंट में हिस्सा लेने आई है। केरल के कन्नूर की रहने वाली अश्वनी ए काफी गरीबी में पली बढ़ी है। वह बीए फाइनल ईयर की छात्रा है।
मां ने खेतों में काम कर मेरी तकदीर को सवारी, अब मेरी बारी
कीर्तना का सपना.. आर्मी में अफसर बनकर करना चाहती है देश की सेवा
मेरी मां ने मेरे लिए दूसरे के खेतों में काम किया ताकि मैं अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी बन सकूं। अब मेरी मां का सपना धीरे-धीरे पूरा हो रहा है। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर कलरीपायट्टू में अच्छा प्रदर्शन के बाद खेलो इंडिया यूथ गेम्स में हिस्सा लेने पहुंची हूं। यह कहना है केरल के कन्नूर की कीर्तना का। कीर्तना ने बताया कि दो बार सरकार की ओर से खेल में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर कैश प्राइज के रूप में स्कॉलरशिप भी मिल चुका है। यहां से जाने के बाद मां सरस्वती को खेतों में काम नहीं करने दूंगी। उसने बताया कि उसके पिता रामाकृष्ण मैैकेनिक का काम करते हैं। कीर्तना आर्मी में अफसर बनकर देश की सेवा करना चाहती है।
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कलरीपायट्टू खेल को देश के हर कोने में पहुंचाने के लिए सीख रहीं हिंदी
राज्य में दो और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में तीन बार नेशनल पदक हासिल कर चुकी है अनस्वरा मुरलीधरन
खेलो इंडिया यूथ गेम्स में हिस्सा लेने पंचकूला पहुंची केरल की अनस्वरा मुरलीधरन हिंदी सीख रही है ताकि वह परंपरागत कलरीपायट्टू को देश के हर कोने तक पहुंचा सके। वह कलरीपायट्टू खेल से जुड़े बारीकियों को 15 साल से सीख रही है। वह राज्य में दो और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में तीन बार नेशनल पदक हासिल कर चुकी है। उसे इसकी प्रेरणा उसकी मां श्रीकला से मिली है। उसके पिता मुरलीधरन आर्मी में हैं। वह 11वीं की छात्रा है।
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