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मोहिंदर केपी और छह विधायकों ने खोला मोर्चा, खनन का मामला राणा गुरजीत के लिए फिर मुसीबत बना

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चंडीगढ़। पंजाब में खनन साइटों की नीलामी में हेराफेरी के आरोपों के कारण मंत्री पद गंवा चुके कपूरथला के विधायक राणा गुरजीत सिंह की मुश्किलें कम होती दिखाई नहीं दे रहीं। नए मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी द्वारा उन्हें अपने मंत्रिमंडल में शामिल कर कैबिनेट मंत्री का दर्जा देने से पहले ही पंजाब कांग्रेस में उन्हें लेकर विवाद खड़ा हो गया है।
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प्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष मोहिंदर सिंह केपी और छह अन्य विधायकों ने मुख्यमंत्री चन्नी और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू को पत्र लिखकर मांग की है कि भ्रष्टाचार के आरोपों को देखते हुए राणा गुरजीत सिंह को मंत्रिमंडल में जगह न दी जाए। केपी के साथ पत्र लिखने वाले छह विधायक हैं- नवतेज सिंह चीमा, बलविंदर सिंह धालीवाल, बावा हेनरी, डॉ. राज कुमार, पवन अदिया और सुखपाल सिंह खैरा।
रविवार को भेजे गए इस पत्र के बाद हालांकि राणा गुरजीत सिंह ने शाम को राजभवन में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में मंत्री पद की शपथ हासिल कर ली है, लेकिन उनके खिलाफ मोर्चा खोलने वाले धड़े ने अब इस मामले को कांग्रेस हाईकमान के सामने ले जाने का फैसला किया है। वैसे, केपी और छह विधायकों ने अपने पत्र में कहा था कि राणा गुरजीत का प्रस्तावित कैबिनेट स्लॉट दोआबा क्षेत्र के एक दलित नेता को दिया जाना चाहिए। पत्र में विधायकों ने लिखा, ‘हम दोआबा के विधायक और नेता, दागी राणा गुरजीत सिंह को मंत्रिमंडल में शामिल करने के प्रस्ताव पर जनता और कांग्रेस कैडर के बीच उत्पन्न नाराजगी इस पत्र के जरिए व्यक्त करना चाहते हैं।
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पत्र में विधायकों ने उल्लेख किया कि राणा गुरजीत को जनवरी 2018 में इसलिए कैबिनेट से हटा दिया गया था, क्योंकि खनन घोटाले में उनके व उनके परिवार और उनकी कंपनियों को सीधे शामिल होने का खुलासा हुआ था, जिसके चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने उन्हें हटाया था।’
पत्र में उन्होंने आगे लिखा, ‘पंजाब सरकार ने प्रदेश में 3 साइटों की खनन नीलामी के लिए एक कंपनी, मेसर्स राजबीर एंटरप्राइजेज द्वारा जमा किए गए लगभग 25 करोड़ रुपये की राशि को जब्त कर लिया था।
जस्टिस नारंग आयोग ने राणा गुरजीत सिंह की उस कंपनी के बारे में चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए थे। मेसर्स राजबीर इंटरप्राइजेज को उक्त खनन नीलामी के लिए गुरिंदर सिंह से 5 करोड़ रुपये की रिश्वत मिली थी, जिसे सतर्कता ब्यूरो ने पकड़ा था और वह अब भी हिरासत में है। केपी और छह विधायकों ने पत्र में यह सवाल भी किया कि कोर्ट या सरकार से क्लीन चिट न मिलने के बावजूद राणा का नाम क्यों शामिल किया गया?
लोगों में गलत संदेश जाएगा : चीमा
विधायक नवतेज सिंह चीमा ने कहा है कि राणा गुरजीत को मंत्री बनाने से लोगों में गलत संदेश जाएगा। जब पार्टी की गिरती छवि सुधारने के लिए ही नई कैबिनेट का गठन कर जनता को अच्छा संकेत देने की कोशिश हो रही है तो राणा गुरजीत को मंत्री बनाए जाने से पार्टी की छवि धूमिल ही होगी।
पार्टी अपने फैसले पर पुनर्विचार करे : खैरा
कांग्रेस में शामिल हुए आप से निलंबित विधायक सुखपाल सिंह खैरा ने कहा है कि राणा गुरजीत पर करोड़ों रुपये के घोटाले के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे आरोपों के कारण ही राणा गुरजीत को मंत्री पद भी छोड़ना पड़ा था तो अब ऐसी क्या मजबूरी है कि उन्हें फिर मंत्री बनाया जा रहा है। इस मामले में कांग्रेस पार्टी को पुनर्विचार करना चाहिए।
यूथ को मिलना चाहिए नेतृत्व : केपी
मोहिंदर सिंह केपी ने कहा कि मंत्रिमंडल में दोआबा क्षेत्र का नेतृत्व राणा गुरजीत को सौंपने के बजाय किसी युवा या दलित नेता को दिया जाना चाहिए। ऐसा नेता जिस पर भ्रष्टाचार के संगीन आरोप हैं, उसे मंत्री बनाने के बारे में पार्टी हाईकमान को नए सिरे से विचार कर फैसला लेना चाहिए।
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