पंचकूला। जिस ठेकेदार ने एक किश्त भरकर खनन ठेका चलाने में असमर्थता जताई और लाइसेंस सरेंडर कर दिया। विभागीय अधिकारियों ने करीब दो साल बाद पुराने रेट पर ही उसी ठेकेदार को दोबारा से खनन की अनुमति दे दी। इतना ही नहीं दो साल के पैसे भी नहीं जमा करवाए। अधिकारियों के इस फैसले से हरियाणा सरकार को करोड़ों के राजस्व का नुकसान हुआ है। मामला कालका के गांव कर्णपुर खनन ठेके की साइट का है। यह मामला अब मुख्यमंत्री मनोहर लाल के पास पहुंच गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में विभागीय अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
पंचकूला निवासी अनिल कुमार ने करोड़ों के घोटाले की शिकायत मुख्यमंत्री मनोहर लाल, खनन एवं परिवहन मंत्री, माइनिंग विभाग के कमिश्नर, डायरेक्टर जनरल, ज्वाइंट डायरेक्टर को पत्र लिखकर की है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि गांव कर्णपुर कालका तहसील के अंतर्गत आता है। सरकार ने मार्च 2019 में ई-ऑक्शन करके खनन की इजाजत दी थी। जिस ठेकेदार को खनन का लाइसेंस मिला, उसने ये कहते हुए लाइसेंस सरेंडर कर दिया और विभाग ने 28 अक्तूबर 2019 को टर्मिनेट भी कर दिया। इसके बाद विभागीय अधिकारियों ने ठेकेदार से चार महीने का शुल्क मांगा तो उसने पहले माफ करने की गुहार लगाई, लेकिन बाद में 18 किश्तों में पैसे जमा करवाने को तैयार हो गया।
दो साल की बकाया राशि भी नहीं हुई जमा
शिकायतकर्ता का आरोप है कि जिस ठेकेदार ने खनन कार्य करने में असमर्थता जताई थी उसने दो साल बाद अधिकारियों के साथ सेटिंग करके पुराने रेट पर ही लाइसेंस बहाल करवा लिया। इतना ही नहीं ठेकेदार ने विभाग को करीब दो साल के पैसे भी जमा नहीं करवाए। जबकि, दो साल की रकम करीब 5.5 करोड़ रुपये बनती है। विभागीय अधिकारियों के उदासीन रवैये से सरकार को करोड़ों के राजस्व का चूना लगा है। वहीं, कई ठेकेदार जिनका लाइसेंस टर्मिनेट हो चुका है वह पुराने रेट पर ही बहाल करवा सकते हैं।
ज्वाइंट डायरेक्टर ने एमओ से मांगा जवाब
खनन विभाग के ज्वाइंट डायरेक्टर आशुतोष राजन का कहना है कि शिकायत मिली है, जिसे उन्होंने डायरेक्टर जनरल को भेज दिया है। इसके अलावा इस पूरे मामले में स्थानीय माइनिंग ऑफिसर से जांच करके रिपोर्ट मांगी है। जांच रिपोर्ट में यदि शिकायत सही मिलेगी तो उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि ये भी पता लगाया जाएगा कि इस पूरे मामले में किस-किस की मिलीभगत है।