चंडीगढ़। पंजाब के किसानों को सिंचाई के लिए बारिश व अन्य साधनों पर आश्रित नहीं रहना पड़ेगा। अब किसान सूरज की रोशनी से खेतों की सिंचाई कर पाएंगे। सरकार राज्य के नौ जिलों के 133 ब्लॉकों में सोलर पंप लगाने जा रही है। पंचायतों से सरकार द्वारा पंपों को लगाने के लिए आवेदन भी मांगने शुरू कर दिए हैं।
राज्य में सिंचाई के लिए किसान 14 लाख से अधिक ट्यूबवेल का प्रयोग कर रहे हैं। इसका प्रमुख कारण यह भी है कि यहां 73 प्रतिशत सिंचाई ट्यूबवेल पर ही निर्भर है। भूमि के क्षेत्रफल के अनुसार 41 लाख हेक्टेयर में से 30 लाख हेक्टेयर की सिंचाई ट्यूबवेल से ही होती है। सिंचाई के लिए राज्य सरकार किसानों को मुफ्त में बिजली मुहैया कराती है। पंजाब के 1,90,000 किसानों को 8,275 करोड़ रुपये की मुफ्त बिजली देने की व्यवस्था की गई है। हालांकि अब केंद्र सरकार पंजाब के किसानों को कुसुम योजना से जोड़ रही है। इसके जरिए किसान अपनी जमीन पर सौर ऊर्जा उपकरण और पंप लगाकर खेतों की सिंचाई कर सकेगा। अभी पंजाब के बठिंडा, फाजिल्का, श्री मुक्तसर साहिब, गुरदासपुर, पठानकोट, होशियारपुर, एसबीएस नगर, रोपड़ तथा एसएएस नगर के अतिरिक्त बठिंडा जिले के तीन ब्लॉकों संगत, रामपुरा तथा तलवंडी साबो में सोलर पंप लगाए जाएंगे।
इन किसानों को नहीं मिलेगा लाभ
ऐसे किसान जिनके नाम सिंचाई के लिए पीएसपीसीएल बिजली कनेक्शन हैं या उनके किसी पारिवारिक सदस्य के नाम पर हैं वे इस योजना के तहत आवेदन नहीं कर पाएंगे। इस योजना के तहत सामान्य वर्ग को 60 प्रतिशत वहीं अनुसूचित जाति वर्ग के लिए 80 प्रतिशत तक केंद्र सरकार की ओर से सब्सिडी दी जाएगी।
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बेच भी सकेंगे किसान बिजली
इस योजना के तहत किसान सब्सिडी पर मिलने वाले सोलर पैनल के जरिए बिजली उत्पादन करेंगे। जरूरत भर बिजली का इस्तेमाल करके वे बाकी को बेच कर अतिरिक्त आय भी कर सकते हैं। इस तरह किसान की जमीन पर बनने वाली बिजली से देश के गांव में बिजली की निर्बाध आपूर्ति शुरू की जा सकती है।
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बंजर भूमि की बढ़ेगी उपयोगिता
यदि किसी किसान के पास बंजर भूमि है तो उसका भी उपयोग इस योजना के तहत किया जा सकता है। किसान अपनी बंजर भूमि पर सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए सोलर पैनल लगा सकता है। जिससे पैदा होने वाली बिजली को वह बेचकर आमदनी कर सकता है।