ऑटो चालक के बेटे ने जीता स्वर्ण, पिता का कर्ज चुकाने के लिए बनेगा कोच
योगासन में आर्टिस्टिक ग्रुप के लड़कों के वर्ग में हिसार निवासी सागर ने अंडर-18 आयुवर्ग में स्वर्ण पदक हासिल किया है। सागर के पिता प्रदीप कुमार ऑटो चलाते हैं। सागर ने अपने माता-पिता के लिए कई सपने बुने हैं। वह सरकारी कोच बनकर अपने पिता का लाखों रुपये का कर्ज चुकाना चाहता है। उसने बताया कि उसके पिता ने अपनी दोस्त की बेटी की शादी के लिए अपने क्रेडिट पर बैंक और कुछ लोगों से ब्याज पर पैसे लेकर दिए थे, लेकिन वह लौटा नहीं पाए। अब उसके पिता कर्ज में डूब गए हैं। पूरे दिन ऑटो चलाते हैं तो बड़ी मुश्किल से सात से आठ सौ रुपये कमा पाते हैं। कुछ बैंक की किस्त में कट जाता और कुछ कर्ज चुकाने में। घर का खर्च बड़ी मुश्किल से चलता है। ऐसे में गुरुग्राम के सरकारी स्कूल में 12वीं कक्षा में पढ़ने वाले सागर ने खेल के रूप में योग को चुना, ताकि आगे चलकर कोच बनकर पिता का कर्ज चुका सकें। इसमें डाइट का बहुत ज्यादा रोल नहीं है। बॉडी फ्लेक्सिबल होनी चाहिए। पैसे के अभाव के चलते सागर ने दूसरे खेलों की जगह योग पर फोकस किया। इससे पहले नेशनल में दो बार स्वर्ण और एक बार सिल्वर व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में चार बाद स्वर्ण पदक जीत चुका है।
सिक्योरिटी गार्ड का बेटा बोला, गरीब बच्चों के लिए खोलूंगा फ्री अकादमी
योग में स्वर्ण पदक जीतने वाले गुरुग्राम के प्रभात कुमार ने बताया कि वह आगे पढ़ाई कर सरकारी योग कोच बनकर गरीब बच्चों के लिए एक फाउंडेशन खोलना चाहते हैं ताकि किसी बच्चे को पैसों के अभाव में पिछड़ना न पड़े। प्रभात ने बताया कि उसके पिता कमलेश राय सिक्योरिटी गार्ड का काम करते हैं। मां सीता देवी हाउस वाइफ हैं। उसे यह सीख उसके पिता से मिली है। उसने बताया कि उसके पिता पैसों के अभाव में 11वीं तक पढ़ पाए। प्रभात कोच देवेंद्र के पास योग की ट्रेनिंग ले रहा है।
महज 13 साल की उम्र में बनी है प्रेरणा
झारखंड की इतु मंडल खेलो इंडिया यूथ गेम्स में देशभर से पहुंचीं कबड्डी टीम की सबसे युवा खिलाड़ी हैं। महज 13 साल की उम्र में इतु खेलो इंडिया यूथ गेम्स का हिस्सा बनी हैं। ट्रैक्टर ड्राइवर की बेटी इतु मंडल को कबड्डी से उस समय प्यार हो गया था, जब वह मात्र आठ साल की थी। उसने बताया कि महाराष्ट्र के खिलाफ पहले मैच के बाद उसके माता-पिता उसे लेकर चिंतित थे, लेकिन उसे कभी डर नहीं लगा। झारखंड के दुमका जिले के मधुबन गांव की इतु ने कहा, कि वह अपने परिवार में सबसे बड़ी बेटी हैं, लेकिन मेरे माता-पिता ने मुझे खुली छूट दी है। उन्होंने मुझ पर विश्वास किया, जिम्मेदारी लेने का कोई दबाव नहीं डाला। उसने बताया उसे खेल में लंबा सफर तय कर कोच बनना है। वह युवाओं के साथ काम करना चाहती है। कबड्डी से प्यार करने में उनकी मदद करना चाहती हैं। उसने बताया कि हाल के वर्षों में कबड्डी देश में एक बड़े खेल के रूप में उभरा है। 2016 में महिलाओं के लिए प्रोफेशनल कबड्डी लीग शुरू हुई थी। इसके बाद युवा लड़कियों का ध्यान खेल की तरफ आकर्षित हुआ था।