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पंचकूला में छठव्रतियों ने डूबते सूर्य को दिया अर्घ्य, दीप जलाए

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घग्गर नदी किनारे उमड़ी भक्तों की भीड़। - फोटो : PKL OFFICE
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पंचकूला। लोक आस्था के महापर्व पर बुधवार शाम छठ व्रतियों ने भगवान भास्कर को पहला अर्घ्य दिया गया। शहरी क्षेत्र में स्थित (घग्गर तट, अभयपुर व सेक्टर 19) घाटों पर छठ पूजा को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह देखने को मिला, यहां शाम चार बजे के बाद युवा से लेकर बुजुर्ग, पुरुष व महिलाएं कठिन व्रत के बीच नंगे पांव घाटों की ओर जाती दिखीं। श्रद्धालुओं ने सिर पर प्रसाद से भरी बांस की टोकरियां ली हुई थीं। उसमें छठ पर्व पर चढ़ने वाले प्रसाद में (गन्ना, ठेकुआ के अलावा केला और अन्य मौसमी फल) थे।
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बता दें कि मंगलवार की रात से ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में छठ पर्व के गीत गूंजते रहे। छठ व्रत रखने वाली महिलाओं की ओर से कई प्रकार के पकवान बनाए गए। इसे एक बड़े पात्र में रखा गया। सुबह से ही निर्जल रहकर स्नानादि और श्रृंगार कर महिलाएं परिवार के लोगों के साथ छठ घाटों पर पहुंची। बुधवार को घाट पर व्रतियों ने दीप प्रज्वलित कर छठ मईया की पूजा की गई।
इसके बाद एक दीप गंगा मईया और एक दीप भगवान भास्कर को अर्पित किया गया। यह सब करने के बाद महिलाएं नदी, तालाब और पोखरों में कमर भर पानी में जाकर खड़ी हो गईं। भगवान भास्कर के डूबने पर उन्हें अर्घ्य दिया गया। इसके बाद व्रती महिलाएं परिवार के सदस्यों के साथ घर लौट आईं। सुबह उगते सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही यह व्रत पूरा हो जाएगा।
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अभयपुर में छठ पूजा का आयोजन
गांव अभयपुर में पूर्व पार्षद सुभाष निषाद और अंकुश निषाद द्वारा शिव मंदिर के पास छठ पूजन का आयोजन किया। महिलाओं ने पानी में खड़े होकर मनोकामनाएं मांगी। छठ पूजा मुख्य रूप से सूर्यदेव की उपासना का पर्व है। निषाद ने बताया कि पौराणिक मान्यताओं के अनुसार छठ सूर्य देवता की बहन हैं। मान्यता है कि छठ पर्व में सूर्योपासना करने से छठ माई प्रसन्न होती हैं और घर परिवार में सुख शांति व धन से संपन्न करती हैं। सेक्टर-19 के शिवमंदिर में पूर्वांचल समिति की ओर से छठ पूजन किया गया। समिति के सदस्य इंद्रजीत यादव, उपेंद्र सिंह, ओमपाल आर्क्ष्य ने बताया कि पहले वह इंडस्ट्रीयल एरिया में यह आयोजन करते थे, लेकिन ओवरब्रिज के निर्माण के चलते सेक्टर 19 में आयोजन किया गया। यह लोगों की आस्था का प्रतीक है। इससे शरीर के सारे कष्टों का नाश हो जाएगा और सौ अश्वमेघ यज्ञ के समान फल की प्राप्ति होती है।
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