पंचकूला। झुरीवाला डंपिंग ग्राउंड पर रविवार रात पुलिस द्वारा टेंट उखाड़ने और पानी की बौछार करने के खिलाफ समिति ने मानवाधिकार आयोग और अदालत जाने का फैसला किया है। पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराकर इसके लिए जिम्मेवार अधिकारियों के खिलाफ पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी भी जाने का फैसला लिया गया है। समिति की सोमवार शाम को हुई बैठक में डीसी के बयानों की भी निंदा की गई, जिसमें उन्होंने वाटर कैनन का प्रयोग नहीं करने की बात कही है।
समिति के कन्वीनर नितेश मित्तल ने बताया है कि सेक्टर-23, 24, 25, 26, 27, 28, ट्रिब्यून मित्र विहार, मोगीनंद, बना, मदनपुर, जयसिंहपुरा के निवासी तीन दिन से झुरीवाला डंपिंग ग्राउंड के खिलाफ शांतिपूर्वक धरना दे रहे थे। पुलिस और प्रशासन ने एक सोची समझी साजिश के तहत बलपूर्वक उनको वहां से उठाया। उपायुक्त ने प्रदर्शनकारियों द्वारा नेशनल हाईवे को जाम करने की बात कही गई, जो पूरी तरह से गलत है। इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की कोई बात नहीं सुनी और न ही उन्हें पर्याप्त समय दिया। उन पर बल प्रयोग किया और पानी की बौछारें की। यह लोगों के मौलिक अधिकारों का हनन है। उन्होंने कहा कि एनजीटी ने यहां कचरा नहीं डालने के आदेश दिए हैं, इसके बावजूद उन नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।
समिति की सदस्य शालिका मल्होत्रा ने कहा कि पुलिस जहां एक तरफ समिति के सदस्यों के साथ बातचीत कर मामले को निपटाने की कोशिश कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ लोगों से साथ जोर जबरदस्ती कर एसीपी राजकुमार कौशिक की अगुआई में उनका टेंट तोड़ा गया। कुर्सियों को फेंका गया और वहां मौजूद अन्य समान की भी तोड़फोड़ कर भारी नुकसान पहुंचाया गया है।
नगर निगम डीएमसी दीपक सूरा ने हमें आश्वासन दिया था कि 15 दिन में यह बता दिया जाएगा कि डंपिंग ग्राउंड को खाली करने में कितना समय लगेगा। यह बात लिखित में देने के लिए भी कहा था, मगर अभी तक लिखित में नहीं दिया गया है। हमें उम्मीद है कि प्रशासनिक अधिकारी अपनी बात पर कायम रहेंगे। - नितेश मित्तल एडवोकेट, कन्वीनर, संघर्ष समिति
हमने प्रशासनिक अधिकारियों से सोमवार दोपहर 11 बजे तक का समय मांगा था। प्रशासन ने कोई भी बात सुनने से इंकार कर दिया। इतनी रात को लोगों के साथ इस तरह का बर्ताव करना बिल्कुल गलत है। जायज मांगों को लेकर लोग धरने पर बैठे थे। रात को प्रशासन ने ऐसा करके कायरतापूर्ण हरकत की है। -हरदीप सिंह, अध्यक्ष सेक्टर-23 आरडब्ल्यूए, संघर्ष समिति सदस्य
हमने कोई नियम नहीं तोड़ा। अपने वाहन भी सलीके के साथ खड़े किए थे। ठंड के मौसम में रात के समय पानी की बौछार लगने से कई लोग बीमार पड़ गए हैं। प्रशासन की यह कार्रवाई किसी भी तरह से न्यायोचित नहीं है। उपायुक्त का यह कहना कि वाटर कैनन का प्रयोग नहीं किया गया, बिल्कुल गलत जवाब है। -संजीव गोयल, अध्यक्ष सेक्टर-25 आरडब्ल्यूए, संघर्ष समिति सदस्य
सेक्टर-23 डंपिंग ग्राउंड को लेकर भी इसी तरह के आश्वासन दिए गए थे। मगर हुआ कुछ नहीं। यहां भी लोगों को बरगलाया गया है। इस डंपिंग ग्राउंड का कोई समाधान नहीं किया जाएगा। फिर भी हम निगम अधिकारियों से मांग करते हैं कि घग्गर पार बसे सेक्टरों में रहने वाले लोगों को इस नरक से निजात दिलाई जाए। -मोहिंदर सिंह बल्हारा, अध्यक्ष सेक्टर-28 आरडब्ल्यूए, संघर्ष समिति सदस्य
नगर निगम ने लोगों को आश्वासन दिया है कि 15 दिन में यह बता दिया जाएगा कि कितने दिन में डंपिंग ग्राउंड को खाली कर दिया जाएगा। लोगों ने निगम के इस आश्वासन को मानकर सहयोग दिया है, वह काफी सराहनीय है। इस पर कमेटी काम कर रही है। हम लोगों को ज्यादा से ज्यादा सुविधा देने का प्रयास कर रहे हैं। -वीरेंद्र सिंह लाठर, कमिश्नर नगर निगम